मर्यादा के पार मीरा की रात






PHPWord


Short Teaser

एक गांव की शांत रात में ,जब सब सो चुके थे – राजीव की आंखों में एक ऐसा ख्याल जगा ,जो उसकी शादी और मर्यादा दोनों को हिला देने वाला था।मीरा के अंदर भी कुछ बदल रहा था कुछ जो अब छुपने वाला नहीं था।

Character Detail

राजीव (30 साल , 5'6", athletic) – शादी के बाद की बोरियत ने उसे भीतर से बेचैन कर रखा है।बाहर से सीधा ,पर अंदर से बेहद जिज्ञासु।छोटी – छोटी हरकतों में excitement ढूंढता है।मीरा (28 साल , slim,नटखट ) – दिखने में सरल ,लेकिन उसके हावभाव में एक छुपा हुआ खेल है।उसकी मुस्कान में teasing का जादू है।उसे पसंद है जब कोई उसकी तारीफ़ आधी निगाहों से करे।करण (31, confident) – राजीव का ऑफिस का दोस्त ,जो मीरा की नज़रों में पहली बार ही कुछ देख लेता है – एक ऐसा spark जो दोस्ती से ज़्यादा है।विजय (34,देसी अंदाज़ ) – राजीव का पड़ोसी ,जिसकी नज़रें अक्सर ज़रूरत से ज़्यादा देर तक ठहर जाती हैं।

Plot / Setting

गांव का माहौल – रात के सन्नाटे में दूर कहीं पंपसेट की गूंज ,हल्की हवा में मिट्टी और पसीने की खुशबू ,और बीच में राजीव का छोटा घर।बाहर से शांत ,भीतर से उमस भरा।शादी को पाँच साल हो चुके हैं ;रोमांस अब दिनचर्या बन चुका है।लेकिन अब कुछ बदलने वाला है।

राजीव ऑफिस से लौटा तो देखा – मीरा बालों को गीला छोड़कर बालकनी में खड़ी थी।धूप में भीगते बालों से पानी की बूंदें गर्दन से होते हुए उसके गले तक जा रही थीं।राजीव कुछ पल चुप रह ा ,फिर बोला , " तू आज जान – बूझकर मुझे तड़पा रही है क्या ?" मीरा मुस्कराई , " तुम्हें कब से इतना ध्यान देने की आदत हो गई ?"

राजीव के लिए वो पल किसी invitation से कम नहीं था।उसने आगे बढ़कर उसके बालों को पीछे किया ,लेकिन मीरा ने शरारती अंदाज़ में खुद को छुड़ा लिया।" पहले नहा लो ,फिर सोचेंगे ," वो हँसी।राजीव मुस्कराता रहा ,पर अंदर कहीं कुछ नया जाग गया था – एक बेचैनी ,एक curiosity ।

शाम को जब करण घर आया ,तो मीरा ने चाय दी।करण की निगाहें अनजाने में ही मीरा के चेहरे पर ज़्यादा देर तक टिकी रहीं।राजीव ने गौर किया ,मगर कुछ नहीं बोला।वो खुद हैरान था कि उसे गुस्सा नहीं आया – बल्कि किसी अजीब से thrill ने उसे घेर लिया।

" भाभी ,आज बहुत अलग लग रही हो " करण ने कहा।मीरा ने हल्की मुस्कान दी , " गांव की हवा ही कुछ ऐसी है शायद।" राजीव हँस पड़ा ,लेकिन उसकी आँखें अब मीरा की हर हरकत पर टिकी थीं।हर बार जब मीरा कुछ झुकी ,या मुस्कराई – राजीव के मन में वही सवाल गूंजा :" अगर कोई और उसकी ओर देखे ,तो मुझे कैसा लगेगा ?"

रात में जब सब सो गए ,राजीव लेटा था पर नींद नहीं आई।उसके दिमाग में करण की बातें और मीरा की हँसी घूमती रही।वो सोचने लगा – क्या मीरा भी ऐसा कुछ चाहती है ?क्या उसकी आँखों में भी वही आग है जो मेरी सोच में है ?

धीरे – धीरे उसने मीरा के गाल को छुआ।मीरा ने आँखें बंद कीं ,फिर धीरे से बोली , " क्या हुआ ?" राजीव ने फुसफुसाकर कहा , " कभी लगा है कि हमें कुछ नया ट्राय करना चाहिए ?" मीरा चुप रही ,पर उसके गले की हरकत बता रही थी कि उसने बात सुनी है।राजीव ने उसका हाथ थामा – उसके अंगुलियों में हल्का कंपन था।" अगर कोई और तुझे देखे या छुए " मीरा ने उसकी ओर देखा – उसकी साँसें तेज़ थीं।" राजीव ,तुम पागल हो गए हो क्या ?" उसने कहा ,लेकिन उसकी आवाज़ में गुस्सा नहीं था ,सिर्फ हल्की कंपकंपी थी।

राजीव ने मुस्कराकर कहा , " शायद पर इस ख्याल से मुझे डर नहीं लगता।" मीरा ने कुछ नहीं कहा ,पर उसकी आँखों में वो चमक लौट आई थी – वही जो कभी उनकी पहली रात में थी।

उस रात कोई कुछ नहीं बोला ,लेकिन कमरे की हवा में इच्छाओं का शोर गूंजता रहा।

Twist / Emotional

अगली सुबह करण फिर आय ा ,इस बार राजीव खुद मुस्कराया।मीरा ने चाय रखी ,पर उसकी नज़रें झुकती नहीं थीं।राजीव ने करण से कहा , " आज खेत चलेंगे ?थोड़ा मज़ा आएगा।" करण ने हामी भरी ,पर उसने महसूस किया – मीरा की आँखों में एक सवाल था और राजीव के चेहरे पर उसका जवाब।

राजीव ,करण और विजय तीनों खेत की तरफ निकले।सूरज ढल रहा था ,हवा में पके धान की खुशबू घुली थी।मीरा आँगन से ही देखती रही – करण ने जाते – जाते जो नज़र डाली ,उसमें कुछ अनकहा था।मीरा का दिल धक से रह गया।उसने खुद को रोकने की कोशिश की ,पर उस नज़र ने कुछ जगा दिया था – एक ऐसा एहसास जो उसने पहले कभी महसूस नहीं किया था।

शाम को जब तीनों लौटे ,राजीव के चेहरे पर अजीब सी चमक थी।करण हँस रहा था ,पर उसकी आँखें अब भी कुछ कह रही थीं।मीरा ने देखा ,और तुरंत पल्लू ठीक किया – मगर करण की नज़रें उसके हाथों से नीचे फिसल चुकी थीं।राजीव सब कुछ देख रहा था ,पर कुछ बोला नहीं।उसकी मुस्कान के पीछे कोई गहरी सोच थी।

रात को मीरा रसोई में थी ,दीया जलाते वक्त करण की हँसी बाहर से सुनाई दी।राजीव ने आवाज़ दी , " करण ,अंदर आ जा मीरा की चाय पीकर जाना।" करण कमरे में आया ,और जैसे ही मीरा ने ट्रे रखी ,उसके हाथ कांप गए।चाय छलक कर करण की उंगलियों पर गिरी।मीरा ने जल्दी से नैपकिन उठाया – " अरे ,जल गया क्या ?" उसका स्पर्श बस एक पल के लिए था ,लेकिन करण के चेहरे पर जो भाव आए ,वो राजीव से छिपे नहीं रहे।

राजीव ने मुस्कराकर कहा , " लगता है भाभी का हाथ ठंडा नहीं ,बहुत गर्म है।" मीरा ने झेंपकर कहा , " आप भी ना " राजीव ने बात वहीं खत्म कर दी ,पर अंदर कुछ बदल गया था।वो देख रहा था – उसकी पत्नी किसी और की नज़रों में सिमट रही है ,और उसे गुस्सा नहीं आ रहा बल्कि उस अहसास में एक अजीब – सी आग है।

रात गहरी हुई तो राजीव ने मीरा से पूछा ," तुम्हें बुरा तो नहीं लगा करण की बातों से ?" मीरा ने तकिया घुमाया , " थोड़ा अजीब लगा पर पता नहीं क्यों ,डर नहीं लगा।" राजीव ने उसकी आँखों में झाँककर कहा , " अगर मैं कहूँ कि मुझे अच्छा लगा ?" मीरा ने उसकी ओर देखा ,जैसे यकीन ना हो।राजीव ने फुसफुसाकर कहा , " शायद मैं वो देखना चाहता हूँ जो कोई और नहीं देख सकता तुम्हारी वो साइड जो अब तक सिर्फ मेरी थी।"

मीरा की साँसें भारी होने लगीं।उसने चेहरा घुमा लिया ,लेकिन गालों का गुलाबीपन राजीव ने साफ देखा।वो पल बिना किसी छूने के भी नशे से भरा था।

अगले दिन करण फिर आया।इस बार राजीव ने खुद कहा , " मीरा ,करण के लिए कुछ पकवान बना दो।आज खेत में काफी मेहनत की।" मीरा ने पल्लू ठीक किया और मुस्कराकर रसोई की ओर चली गई।करण उसकी चाल को देखता रहा – हर बार की तरह उसकी नज़रें ज़रूरत से ज़्यादा देर तक ठहर गईं।राजीव ने देखा ,और हँसते हुए बोला , " करण ,तेरी निगाहें बहुत बोलती हैं।" करण ने जवाब दिया , " भाभी जैसी को देखकर कौन चुप रह पाएगा ?" राजीव ने हल्के स्वर में कहा , " शायद कोई भी नहीं।"

मीरा रसोई से बाहर आई ,थाली रखते हुए उसकी उंगलियाँ करण की उंगलियों से हल्के से टकराईं।वो बस एक क्षण था ,मगर उसमें जैसे सब कुछ थम गया।करण ने धीमे से कहा , " भाभी ,हाथ जल गया होगा।" मीरा ने मुस्कराकर कहा , " नहीं ,बस गर्म हो गया।"

राजीव वहीं खड़ा सब देख रहा था – उसके अंदर अब जलन नहीं थी ,सिर्फ curiosity थी।वो देखना चाहता था ,ये सब कहाँ तक जा सकता है।

रात को जब मीरा ने उससे कह ा ," तुम मुझे ऐसे क्यों देख रहे थे आज ?" राजीव ने कहा , " क्योंकि आज तुम पहली बार खुली लगीं।जैसे किसी ने बंद खिड़की खोल दी हो।" मीरा ने पलटकर पूछा , " और अगर वो खिड़की किसी और ने खोली हो ?" राजीव ने मुस्कराते हुए कहा , " तो मैं बाहर खड़ा देखकर खुश हो जाऊँगा।"

मीरा सन्न रह गई।वो समझ नहीं पा रही थी कि ये उसकी मर्यादा की परीक्षा थी या किसी नई शुरुआत का इशारा।पर अंदर कहीं ,वो भी अब उस रहस्यमयी खेल में खिंच चुकी थी।

Twist / Emotional

रात को करवटें लेते हुए मीरा ने महसूस किया – उसके अंदर का डर अब किसी नई चाह में बदल रहा है।राजीव की बातों में जो पागलपन था ,वही अब उसकी धड़कनों में है।और शायद अगली बार ,जब करण आएगा वो रोक नहीं पाएगी खुद को ।

सुबह की ठंडी हवा में मीरा बरामदे में बैठी थी।सूरज की किरणें उसके चेहरे पर गिर रही थीं ,पर मन किसी और धूप में जल रहा था।रात की बातें उसके कानों में अब भी गूंज रही थीं – राजीव की मुस्कान ,उसकी आवाज़ ,और वो अजीब – सी आज़ादी जो उसने महसूस की थी।

राजीव अख़बार लिए बाहर आया ,पर उसकी निगाहें मीरा पर टिक गईं।वह कुछ पल चुप रहा ,फिर बोला ," कल खेतों में थोड़ी तैयारी करनी है तू भी चलेगी ?" मीरा ने चौंककर देखा , " मैं ?खेत में ?" राजीव ने हल्की मुस्कान दी , " हाँ ,बस घूमने के लिए।करण भी होगा।"

मीरा ने कुछ नहीं कहा ,पर उसके दिल की धड़कन अचानक तेज़ हो गई।वह समझ नहीं पा रही थी कि डर ज्यादा है या चाहत।

दोपहर ढली तो वो तीनों खेत की तरफ निकले।हवा में गर्मी थी ,मगर ज़मीन से उठती मिट्टी की महक अजीब सुकून दे रही थी।राजीव आगे चल रहा था ,करण और मीरा पीछे।करण की बातें सामान्य थीं ,पर आवाज़ में एक धीमी गरमाहट थी।" भाभी ,शहर की औरतें इतनी सीधी नहीं होतीं ," वह बोला।मीरा मुस्कराई , " तो तुम शहरवालों को सीधी औरतें पसंद नहीं आतीं क्या ?" करण ने हँसते हुए कहा , " सीधी हो या टेढ़ी ,दिल तो बस उन्हीं पर आता है जो नज़र मिलाकर कुछ छिपा लेती हैं।"

राजीव ने पीछे मुड़कर देखा – मीरा की मुस्कान को ,करण की नज़रों को।उस पल उसकी साँसों में एक अजीब – सा रोमांच था।

खेत के बीच पहुँचे तो चारों तरफ सन्नाटा था।दूर तालाब के पास कुछ गाएँ चर रही थीं ,हवा में गुनगुनाहट थी।राजीव ने पंपसेट चलाया ,और अचानक पानी की धार खेत में फूट पड़ी।छींटे मीरा के पैरों तक आए।मीरा ने घबराकर पीछे कदम लिया ,लेकिन करण ने उसके हाथ को थाम लिया ताकि वह फिसले नहीं।वो स्पर्श कुछ पल का था ,पर मीरा की आँखें वहीं थम गईं।

राजीव ने देख ा ,और धीरे से पंपसेट बंद कर दिया।हवा में अब सिर्फ पानी की महक थी और तीनों की साँसों की आवाज़।मीरा ने हाथ छुड़ाकर कपड़े ठीक किए ,पर करण ने हल्की आवाज़ में कहा ," माफ़ करना भाभी ,हाथ बस बचाने को " मीरा ने बस सिर झुका लिया।

घर लौटते वक्त राजीव चुप था।रास्ते भर उसकी आँखें खेत की दिशा में थीं।शाम को जब मीरा ने पूछ ा ," कुछ सोच रहे हो ?" राजीव ने कहा , " बस वही जो कल रात कहा था।" " क्या तुम सच में चाहते हो कि " मीरा रुक गई।राजीव ने कहा , " मैं कुछ चाहता नहीं ,बस देखना चाहता हूँ कि हम दोनों कितना संभाल सकते हैं।"

रात धीरे – धीरे सरकती गई।मीरा आईने के सामने बाल सुलझा रही थ ी ,तभी दरवाज़े पर हल्की आहट हुई।राजीव था।उसने पीछे से आकर उसके कंधे पर हाथ रखा ," अगर कल फिर करण आए क्या तुम उससे वैसे ही रह पाओगी ,जैसे आज रहीं ?" मीरा ने आईने में उसकी आँखों में देखा – वो शांत नहीं थीं।" पता नहीं ," उसने कहा , " शायद अब मैं खुद भी नहीं जानती।"

राजीव ने धीमे स्वर में कह ा ," मैं चाहता हूँ तुम डरना बंद करो।जो महसूस होता है ,उसे बस महसूस होने दो।" मीरा ने पलटकर पूछा , " और अगर सब कुछ बदल गया तो ?" राजीव ने कहा , " शायद हम वहीं से शुरू कर पाएँगे ,जहाँ हमेशा से चाहते थे।"

उसने मीरा का हाथ थामा – इस बार कोई शरारत नहीं थी ,बस सच्चाई थी।दोनों चुप रहे ,बस कमरे में हवा का एक धीमा कंपन था ,जो सब कह रहा था।

Twist / Emotional

रात के आखिर में मीरा ने देखा – राजीव खिड़की से बाहर खेतों की तरफ देख रहा था।वहाँ दूर किसी दीये की लौ टिमटिमा रही थी ,और उसी दिशा में अगले दिन करण को आने का बुलावा था।मीरा समझ गई ,ये खेल अब बस नज़रों तक सीमित नहीं रहेगा।

अगली दोपहर खेत में धूप अभी भी हल्की गर्म थी।मीरा ,राजीव और करण सब पहुंचे।हवा में अब भी मिट्टी और हल्की नमी की खुशबू थी।मीरा का दिल तेज़ धड़क रहा था।उसे नहीं पता था कि आज कुछ अलग होगा।

राजीव ने हल्की मुस्कान दी और कहा , " आज थोड़ा काम भी करना है ,मज़ाक भी।" करण ने आँखें चमकाते हुए कहा , " भाभी ,देखेंगे कि कौन ज्यादा मेहनत कर सकता है।" मीरा ने हँसते हुए कहा , " मुझे लगता है मैं दोनों में सबसे तेज़ हूँ।" राजीव और करण दोनों हँसे ,पर मीरा ने महसूस किया कि दोनों की निगाहें सिर्फ उसकी चाल पर टिकी थीं।

खेत के बीच में एक झूला बना था।मीरा को जैसे अचानक याद आया ,पिछली बार वहाँ जब पानी की बूंदें उसके पैरों पर गिरी थीं ,तो जो अहसास हुआ था।वह झूले पर बैठ गई।राजीव पीछे खड़ा था ,और करण सामने झुककर उसकी बातों में उलझा हुआ था।

मीरा ने धीरे – धीरे झूले को हिलाया।राजीव ने कहा , " तुम्हारा हिलना मुझे कोई बात समझ नहीं आती।" मीरा ने मुस्कराकर कहा , " क्योंकि तुम ही समझोगे।" करण ने हल्की आवाज़ में कहा , " भाभी ,लगता है कोई secret खेल चल रहा है।" मीरा ने पलटकर उसकी ओर देखा ,पर कोई जवाब नहीं दिया।

राजीव ने झूले के पास आकर धीरे से कह ा ," मीरा ,तुम डरती हो या चाहती हो ?" मीरा ने आँखें झुका लीं।उसका दिल तेजी से धड़क रहा था।" दोनों कुछ – कुछ ," उसने कहा।राजीव ने हल्का हँसते हुए कहा , " तो फिर डरने की जरूरत नहीं।बस महसूस करो।"

करीब खड़े करण की नज़रों में अब एक अजीब – सी उत्सुकता थी।मीरा ने महसूस किया कि उसके हल्के हाथों के झूले का स्पर्श दोनों के लिए संकेत बन चुका था।वह झुकी ,राजीव के हाथों से स्पर्श महसूस कर रही थी ,और करण की आँखें उसे पकड़ने की कोशिश कर रही थीं।

धीरे – धीरे शाम ढलने लगी।हवा ठंडी हो रही थी।मीरा की साँसें तेज़ थीं।वह समझ रही थी कि अब वह बस संकेतों और इशारों में ही अपने मन की चाह व्यक्त कर रही है।राजीव ने कहा , " अगर कल कोई और आए तो क्या हम सब इसे सिर्फ खेल मानेंगे ?" मीरा ने धीरे – धीरे सिर हिलाया , " शायद अब मैं खुद को रोक नहीं पा रही।"

करण ने चुपचाप देखा।उसके भीतर भी उत्सुकता बढ़ रही थी ,पर वह जानता था कि अभी कोई हद पार नहीं हुई।मीरा की आँखों में blush था ,हाँथों में हल्की कंपकंपी ,और उसके हावभाव में नटखट teasing ।

शाम को लौटते समय राजीव ने मीरा का हाथ थामा।मीरा ने पलटकर उसकी आँखों में देखा।" ये सब अब तक सिर्फ संकेत हैं ,है ना ?" उसने पूछा।राजीव ने मुस्कराते हुए कहा , " हाँ लेकिन हर संकेत की गहराई आज और कल बढ़ सकती है।"

Twist / Emotional

मीरा ने महसूस किया कि अब डर और चाहत के बीच की रेखा धुंधली हो गई है।राजीव की मुस्कान में भी अब सिर्फ प्यार नहीं , curiosity और thrill थी।करण की नज़रें भी अब सिर्फ दोस्ती की हद में नहीं थीं।मीरा ने सोचा – अगले दिन ,जब सूरज उगेगा ,शायद सब कुछ और बदल जाएगा।

अगली सुबह की हल्की धूप कमरे में घुस रही थी।मीरा चाय लेकर बैठी थी ,राजीव दूर खिड़की के पास खड़ा था।उसकी आँखों में वही चमक थी – जो पिछले कुछ दिनों से बढ़ती जा रही थी।

" कल खेत में ," राजीव ने धीमे स्वर में कहा , " जो देखा तुमने ,वही सब अब और करीब से देखेंगे।" मीरा ने हल्का हँसकर कहा , " राजीव तुम पागल हो रहे हो ?" " श ायद पर पागलपन कभी – कभी सच को सामने लाता है ," उसने फुसफुसाया।

करीब ही करण खड़ा था।वह चुपचाप देख रहा था ,पर उसकी आँखों में curiosity और excitement दोनों थीं।मीरा ने महसूस किया कि उसकी हर हल्की मुस्कान और झुकाव ,दोनों ही पुरुषों के दिलों में एक हलचल पैदा कर रहे हैं।

खेत जाते समय ,राजीव ने मीरा के हाथ को हल्का पकड़ लिया।मीरा ने पलटकर उसकी आँखों में देखा।" क्या ये फिर वही खेल है ?" उसने पूछा।" खेल ?" राजीव ने मुस्कराते हुए कहा , " नहीं बस संकेत।तुम्हारे और मेरे बीच।"

करीब पंपसेट के पास ,मीरा झुककर पानी की बाल्टी उठाने लगी।राजीव पीछे खड़ा था ,और उसका हाथ अनजाने में मीरा की कमर को छू गया।मीरा ने हड़बड़ी में पीछे झुककर कहा , " ओह तुमने मुझे डराया।" राजीव ने हल्की हँसी के साथ कहा , " डर या चाहत बस फर्क महसूस करो।"

करण भी पास था।उसने महसूस किया कि मीरा की हर हल्की हलचल ,राजीव के ध्यान को खींच रही है।वह चुप रहा ,पर अंदर से उत्सुकता और tension बढ़ती जा रही थी।मीरा के गाल हल्के गुलाबी हो गए।उसने अपने बाल ठीक किए ,पर हाथों की हल्की कंपकंपी खुद को नहीं छुपा सकी।

सूरज ढलते हुए ,हवा ठंडी होने लगी।मीरा झूले पर बैठी ,और राजीव पास खड़ा।" तुम्हें पता है ," उसने कहा , " जब तुम ऐसे मुस्कराती हो तो मैं समझ नहीं पाता कि मैं बस देखूं या कुछ करूँ।" मीरा ने आँखें झुका लीं ,हाँथ में झिझक थी ,पर मन में एक अजीब रोमांच।

करण ने हल्की आवाज़ में कहा , " भाभी ,लगता है खेल अब गंभीर हो गया।" मीरा ने पलटकर उसकी ओर देखा ,पर कोई जवाब नहीं दिया।राजीव ने उसकी तरफ देखा और कहा , " शायद आज रात कुछ नया महसूस होगा।"

खेत से लौटते समय मीरा ने महसूस किया कि उसके भीतर डर और चाहत का संतुलन अब बिगड़ चुका था।राजीव की मुस्कान में curiosity और excitement बढ़ चुकी थी।करण की आँखें भी अब सिर्फ दोस्ती के हद में नहीं रहीं।मीरा ने सोचा – " कल ,जब सूरज फिर उगेगा ,शायद मैं खुद को और रोक नहीं पाऊँगी।"

Twist / Emotional

रात के अंधेरे में ,घर की खिड़की से बाहर की हवा में मीरा ने महसूस किया – राजीव की आँखों में सिर्फ प्यार नहीं ,चाहत और thrill भी है।करण की नज़रों में अब सिर्फ जिज्ञासा नहीं , anticipation भी है।मीरा ने खुद से कहा , " शायद अगले दिन सब कुछ बदल जाएगा और मैं भी बदल जाऊँगी।"

शाम ढल रही थी।खेत से लौटकर मीरा घर के बरामदे में बैठी थी ,और राजीव पास खड़ा था।उसकी निगाहें उसे पढ़ रही थीं – हर हल्की मुस्कान ,हर झुकी हुई पलक ,हर नटखट gesture ।मीरा ने महसूस किया कि उसकी हर हल्की हरकत राजीव के दिल में एक अजीब सा उथल – पुथल पैदा कर रही थी।

" त ुम कल खेत में बहुत अलग लग रही थीं ," राजीव ने धीमे स्वर में कहा।मीरा ने सिर झुका लिया।" अलग कैसे ?" " ज ैसे तुम्हारी अंदर की किसी इच्छा ने खुद को थोड़ी देर के लिए दिखा दिया हो ," राजीव ने मुस्कराते हुए कहा।मीरा की साँसें तेज़ हो गईं।उसे पता था कि ये सिर्फ शब्द नहीं हैं – हर भाव में teasing और curiosity है।

करीब ही करण खड़ा था।वह चुपचाप देख रहा था ,पर उसकी आँखों में excitement और tension साफ़ थी।मीरा ने महसूस किया कि उसकी हर हल्की मुस्कान और पलटा हुआ सिर ,दोनों पुरुषों के दिलों में हलचल पैदा कर रहा है।उसने हँसते हुए कहा , " शायद मैं खुद भी नहीं समझ पा रही कि ये सब क्या हो रहा है।"

राजीव ने पास आकर उसकी उंगलियों को हल्का छुआ।मीरा ने पलटकर उसकी आँखों में देखा ,और एक पल के लिए डर और चाहत के बीच रुक गई।" राजीव " उसने फुसफुसाया , " तुम ये सब क्यों कर रहे हो ?" " क्योंकि मैं देखना चाहता हूँ कि तुम खुद को कितनी हद तक खोल सकती हो ," राजीव ने जवाब दिया।

करण ने हल्की हँसी के साथ कहा , " भाभी ,लगता है मैं बस spectator हूँ।" मीरा ने पलटकर उसकी तरफ देखा ,पर कोई जवाब नहीं दिया।राजीव ने उसकी ओर देखकर कहा , " आज रात ,जब सब सो जाएंगे ,शायद कुछ और भी महसूस होगा।"

मीरा के दिल में हल्की कंपकंपी उठी।वह समझ रही थी कि राजीव की teasing अब सिर्फ नज़रों तक सीमित नहीं रही – हर स्पर्श ,हर संकेत ,हर मुस्कान में अब tension और excitement दोनों थे।

रात के समय ,जब घर में सन्नाटा था ,राजीव ने धीरे से मीरा का हाथ थामा।" तुम डर रही हो या चाह रही हो ?" उसने पूछा।मीरा ने पलटकर उसकी आँखों में देखा।" दोनों कुछ – कुछ।" राजीव ने मुस्कराया , " तो बस महसूस करो।रोकने की जरूरत नहीं।"

करीब ही करण कमरे के बाहर खड़ा था ,पर उसने अंदर आने का साहस नहीं किया।मीरा की आँखों में blush था ,और उसके हाथों में हल्की कंपकंपी।वो समझ चुकी थी कि अब बस संकेतों और teasing के खेल ने उसे पूरी तरह घेर लिया है।

Twist / Emotional

रात के आखिर में मीरा ने महसूस किया – राजीव की मुस्कान में curiosity और thrill बढ़ चुका है ,करण की आँखों में anticipation है।वो खुद भी अब डर और चाहत के बीच संतुलन नहीं बना पा रही थी।मीरा ने सोचा – " कल ,जब सूरज उगेगा ,शायद मैं खुद को और नहीं रोक पाऊँगी और शायद ये खेल और गहरा हो जाएगा।"

शाम ढल रही थी और घर के चारों ओर सन्नाटा छा गया था।मीरा खिड़की के पास खड़ी थी ,हल्की हवा उसके बालों में खेल रही थी।राजीव पास आया ,और उसकी नज़रें सीधे उसके चेहरे पर टिक गईं।" तुम कल खेत में बहुत अलग लग रही थी ," उसने धीरे से कहा।

मीरा ने पलटकर उसकी आँखों में देखा।" अलग कैस े ?" राजीव ने हल्की हँसी के साथ कहा , " जैसे तुम्हारे भीतर कोई पागलपन बाहर झलक रहा हो ,जिसे मैं पकड़ना चाहता हूँ।" मीरा की धड़कन तेज़ हो गई।उसने महसूस किया कि राजीव की बातें अब सिर्फ शब्द नहीं हैं ,बल्कि हर इशारे में teasing और curiosity हैं।

करीब ही करण खड़ा था ,लेकिन वह कमरे के बाहर चुपचाप खड़ा रह गया।उसकी आँखों में excitement थी ,पर वह जानता था कि अभी कुछ भी खुलकर सामने नहीं आया।मीरा ने महसूस किया कि राजीव की हर हल्की मुस्कान और उसकी हर झुकी हुई पलक ,दोनों पुरुषों के मन में हलचल पैदा कर रही हैं।

राजीव ने पास आकर मीरा का हाथ धीरे से थामा।" डर रही हो या चाह रही हो ?" उसने फुसफुसाकर पूछा।मीरा ने पलटकर उसकी आँखों में देखा।" दोनों कुछ – कुछ।" राजीव ने मुस्कराया , " तो बस महसूस करो।रोकने की जरूरत नहीं।"

मीरा की धड़कनें बढ़ रही थीं।उसके भीतर डर और चाहत का संतुलन अब बिल्कुल हल्का हो गया था।वो समझ चुकी थी कि राजीव की teasing अब सिर्फ संकेतों तक सीमित नहीं है।हर शब्द ,हर मुस्कान ,हर हल्की छुअन में अब tension और anticipation दोनों थे।

राजीव ने उसकी कमर के पास हल्का स्पर्श किया ,और मीरा ने खुद को पीछे खींचा ,पर उसकी आँखों में excitement और blush साफ़ था।" तुम भी जानती हो कि ये खेल अब बस नजरों तक सीमित नहीं रहेगा ," राजीव ने धीमे स्वर में कहा।मीरा ने हल्की हँसी के साथ कहा , " शायद अब मैं खुद को और रोक नहीं सकती।"

वो पल इतना लंबा लगा कि जैसे समय खुद रुक गया हो।मीरा की आँखों में डर , curiosity और चाहत का मिश्रण था।राजीव ने धीरे से कहा , " कल जब सूरज उगेगा ,हम सब कुछ महसूस करेंगे और शायद मैं तुम्हें वही दिखाऊँ जो अब तक केवल तुम सोचती थीं।"

करीब ही करण खड़ा था ,पर उसने अंदर आने का साहस नहीं किया।मीरा ने महसूस किया कि अब सिर्फ संकेत और teasing ही उसकी दुनिया को घेर रहे हैं।उसने खुद से कहा , " अब शायद मुझे खुद को रोकना मुश्किल होगा और ये खेल और गहरा होगा।"

Twist / Emotional

रात के अंत में ,मीरा ने महसूस किया – राजीव की मुस्कान में curiosity और thrill पूरी तरह बढ़ चुका है।करण की आँखों में anticipation और subtle excitement है।मीरा खुद भी अब डर और चाहत के बीच संतुलन नहीं बना पा रही थी।वो जान चुकी थी कि अगली सुबह ,जब सूरज उगेगा ,उसके अंदर का नया खेल और गहराई तक जाएगा।

अगली सुबह की हल्की रोशनी कमरे में घुस रही थी।मीरा खिड़की के पास खड़ी थी ,और राजीव उसके पीछे खड़ा था।उसकी आँखों में वही चमक थी – जो पिछले दिनों से बढ़ती जा रही थी।

" कल खेत में तुम्हारे व्यवहार ने मुझे सोचने पर मजबूर कर दिया ," राजीव ने धीरे से कहा।मीरा ने पलटकर उसकी आँखों में देखा।" क्या सोचने पर ?" " क ि अब हम बस संकेतों तक सीमित नहीं रह सकते ," राजीव ने मुस्कराते हुए कहा।मीरा की धड़कनें तेज़ हो गईं।उसने महसूस किया कि राजीव की बातें सिर्फ teasing नहीं हैं ,बल्कि भावनाओं और इच्छाओं का खेल हैं।

करीब ही करण खड़ा था ,पर वह चुप रहा।उसकी आँखों में curiosity और subtle excitement थी।मीरा ने महसूस किया कि उसकी हर हल्की मुस्कान और झुकाव ,दोनों पुरुषों के मन में उथल – पुथल पैदा कर रहे हैं।

राजीव ने पास आकर मीरा का हाथ हल्का सा छुआ।" डर रही हो या चाह रही हो ?" उसने पूछा।मीरा ने पलटकर उसकी आँखों में देखा।" दोनों कुछ – कुछ।" राजीव ने मुस्कराते हुए कहा , " बस महसूस करो ,कोई रोक नहीं सकता।"

मीरा की आँखों में blush और दिल में हल्का कंपकंपी।उसने समझा कि अब केवल teasing नहीं ,बल्कि उसके भीतर की चाहत भी boundary cross करने को तैयार थी।राजीव ने उसकी कलाई पकड़ी ,हल्का खिंचाव महसूस हुआ।" अब बस संकेत नहीं ,भावनाओं का खेल है ," उसने कहा।मीरा ने सिर झुकाया ,सांसें तेज़।

करीब ही करण खड़ा था ,पर उसने हिम्मत नहीं दिखाई।मीरा ने महसूस किया कि अब सिर्फ नजरों और इशारों का खेल उसे पूरी तरह घेर चुका था।उसने खुद से कहा , " अब मैं खुद को रोक नहीं सकती और शायद ये खेल कल और गहरा हो जाएगा।"

शाम को खेत की ओर जाते समय ,राजीव ने धीरे से कहा ," तुम जानती हो ,ये खेल अब अपनी सीमा तक पहुँच चुका है।कल हम सब महसूस करेंगे कि हमारी चाहत कितनी दूर तक जा सकती है।" मीरा ने सिर हिलाया ,उसकी आँखों में डर और उत्सुकता का मिश्रण।करण की निगाहें भी अब सिर्फ spectator नहीं थीं ,अंदर से वह भी खेल का हिस्सा बनने को तैयार था।

Twist / Emotional

रात के अंधेरे में ,मीरा ने महसूस किया – राजीव की मुस्कान में thrill और curiosity peak पर है।करण की आँखों में anticipation और excitement भी अब पूरी तरह उजागर हैं।मीरा खुद भी अब डर और चाहत के बीच संतुलन नहीं बना पा रही थी।वो जान चुकी थी कि अगली सुबह ,जब सूरज उगेगा ,कहानी का असली खेल और climax की ओर बढ़ेगा।

अगली सुबह ,सूरज की हल्की रोशनी कमरे में गिर रही थी।मीरा खिड़की के पास खड़ी थी ,दिल की धड़कन तेज़।राजीव पास आया ,उसकी आँखों में वही चमक और teasing थी जो पिछले दिनों से बढ़ती जा रही थी।

" कल खेत में जो खेल शुरू हुआ थ ा ," राजीव ने धीरे कहा , " अब वो बस संकेत नहीं रहा।" मीरा ने पलटकर उसकी आँखों में देखा।" क्या मतलब ?" " मतलब ,अब हर झलक ,हर मुस्कान ,हर हल्की छुअन हमारी boundaries को चुनौती दे रही है।" मीरा की सांसें तेज़ हो गईं।वो जान चुकी थी कि राजीव की teasing अब सिर्फ संकेतों तक सीमित नहीं है।

करीब ही करण खड़ा था।उसकी आँखों में curiosity और subtle excitement थी।मीरा ने महसूस किया कि उसकी हर हल्की मुस्कान और झुकाव ,दोनों पुरुषों के मन में anticipation पैदा कर रहे हैं।उसने हल्की हँसी के साथ कहा , " शायद अब मैं खुद को रोक नहीं सकती।"

राजीव ने पास आकर उसका हाथ धीरे छुआ।" डर या चाहत ?" उसने फुसफुसाया।" दोनों कुछ – कुछ।" मीरा ने धीरे कहा।राजीव ने मुस्कराया , " बस महसूस करो।कोई रोक नहीं सकता।"

खेत की तरफ जाते समय ,हवा में हल्की ठंडक और मिट्टी की महक थी।मीरा झूले पर बैठी ,राजीव पास खड़ा।करण थोड़ी दूरी पर ,चुपचाप ,लेकिन भीतर उत्सुकता के साथ।

मीरा ने महसूस किया कि अब सिर्फ teasing नहीं ,बल्कि उसके भीतर की चाहत भी boundary cross करने को तैयार है।राजीव ने हल्का खिंचाव महसूस करते हुए कहा , " अब संकेत नहीं ,भावनाओं का खेल है।" मीरा की आँखों में blush और दिल में हल्का कंपकंपी।

सूरज ढलने लगा।राजीव ने धीमे स्वर में कहा , " कल सब कुछ महसूस करेंगे।तुम खुद जानोगी कि हमारी चाहत कितनी दूर तक जा सकती है।" मीरा ने सिर हिलाया ,डर और उत्सुकता का मिश्रण उसके चेहरे पर साफ़ था।करण की निगाहें भी अब सिर्फ spectator नहीं रहीं ,भीतर से वो भी खेल का हिस्सा बनने को तैयार था।

Twist / Emotional

रात के अंधेरे में ,मीरा ने महसूस किया – राजीव की मुस्कान में thrill और curiosity peak पर है।करण की आँखों में anticipation और excitement पूरी तरह उजागर हैं।मीरा खुद भी अब डर और चाहत के बीच संतुलन नहीं बना पा रही थी।वो जान चुकी थी कि अगली सुबह ,जब सूरज उगेगा ,कहानी का असली climax और पूर्ण teasing की गहराई सामने आएगी।

सुबह की हल्की धूप कमरे में गिर रही थी।मीरा खिड़की के पास खड़ी थी ,दिल की धड़कन तेज़ और हाथों में हल्का कांपना।राजीव पास खड़ा था ,उसकी आँखों में वही teasing और curiosity जो पहले कभी इतनी गहराई से नहीं दिखी।करण कमरे के बाहर खड़ा ,अंदर आने की हिम्मत जुटा रहा था।

" आज कुछ अलग होगा ," राजीव ने धीरे फुसफुसाया।मीरा ने पलटकर उसकी आँखों में देखा।" अलग कैसे ?" राजीव ने हल्की मुस्कान दी , " जैसे हम सब अपनी हदें पहचानेंगे और उन्हें महसूस करेंगे।"

मीरा की धड़कनें तेज़ हो गईं।वो जान चुकी थी कि यह सिर्फ teasing नहीं ,अब उसके भीतर की चाहत भी boundary cross करने को तैयार थी।राजीव ने पास आकर उसका हाथ हल्का छुआ।" डर या चाहत ?" उसने पूछा।" दोनों कुछ – कुछ।" मीरा ने धीरे कहा।

करीब ही करण खड़ा था ,उसकी निगाहें मीरा और राजीव के बीच के हर संकेत को पकड़ रही थीं।मीरा ने महसूस किया कि अब सिर्फ संकेतों और teasing का खेल नहीं है ,बल्कि तीनों के बीच emotion और anticipation का चरम है।

खेत की तरफ जाने का फैसला हुआ।हवा में मिट्टी और हल्की ठंडक की महक थी।मीरा झूले पर बैठी ,राजीव पास खड़ा।करण थोड़ी दूरी पर खड़ा ,चुपचाप ,पर अंदर उत्सुक और सजग।

राजीव ने हल्का खिंचाव महसूस करते हुए कहा , " अब संकेत नहीं ,भावनाओं का खेल है।" मीरा की आँखों में blush और दिल में हल्की कंपकंपी।उसने अपने हाथ हल्के से राजीव के हाथ में डाल दिए।

सूरज ढलने लगा ,और हवा में रोमांच और anticipation दोनों घुलने लगे।मीरा ने खुद से कहा , " अब मैं खुद को रोक नहीं सकती और ये खेल अपनी पूरी गहराई तक जाएगा।"

राजीव ने धीरे से कहा , " अब सब कुछ महसूस होगा।तुम जानोगी कि हमारी चाहत कितनी दूर तक जा सकती है।" मीरा ने सिर हिलाया ,डर और उत्सुकता के मिश्रण के साथ।करण की निगाहें भी अब केवल spectator नहीं रहीं – भीतर से वह भी खेल का हिस्सा बनने को तैयार था।

Final Emotional / Climax Build-up

रात के अंधेरे में ,तीनों के बीच tension peak पर था।मीरा का blush,हल्की कंपकंपी और तेज़ साँसें – राजीव की teasing और subtle guidance – करण की curiosity और anticipation ।हर संकेत ,हर नज़र ,हर हल्का स्पर्श अब एक final emotional और psychological climax की तैयारी थी।

मीरा ने महसूस किया – राजीव की मुस्कान में thrill और curiosity चरम पर है।करण की आँखों में anticipation पूरी तरह उजागर है।और अब ,वह खुद भी डर और चाहत के बीच संतुलन खो चुकी थी।

सुबह का सूरज उगा और हवा में हल्की गर्माहट थी।तीनों अब उस सीमा के करीब थे ,जहाँ सबसे बड़ी चाहत , teasing और anticipation अपने चरम पर पहुँच चुकी थी ,और कहानी ने climax की ओर अंतिम इशारा दे दिया।

 


Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *