सावन की फुहारों में छुपी आग

चाची और भतीजे का गाँव का गुप्त मिलन



दोपहर की छाँव में गूँजी वो अधूरी चाहत

लंच ब्रेक में कही गई बात भारी पड़ गई



गाँव की सुहागन और अकेले शिक्षक की रात

चौपाल के पीछे अँधेरे में शुरू हुआ वो गरम सफर