टूटा बटन और भीगी चाची






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🔥 चाची की चूची और टूटा बटन: गर्मियों में फिसलते अंग

🎭 गर्मी की दोपहर, पसीने से चिपचिपा ब्लाउज और अचानक टूटा बटन। एक नज़र ने जो काम किया, वो आधी रात की छेड़छाड़ भी नहीं कर पाती। अब वो झाड़ू लगाती है और मेरी नज़रें उसके खुले हुए बटनों में घुस जाती हैं।

👤 राधिका (चाची): ३८ वर्ष। मखमली गोरी काया, भरी हुई चूचियाँ जो कसी हुई ब्लाउज में तनाव पैदा करती हैं, मोटे चुतड़। विधवा होने के बाद से सात साल से दबी हुई वासना उबल रही है।

👤 अमन (भतीजा): २२ वर्ष। गाँव लौटा कॉलेज ड्रॉपआउट। शहर की देह-भाषा जानता है पर गाँव की पुरानी भूख अभी शांत नहीं हुई है।

📍 सेटिंग: छोटा सा गाँव, जून की तपती दोपहर। पंखा भी बेकार, हवा में उमस। राधिका का घर, बरामदे में झाड़ू चलाते हुए वो और अमन जो अंदर से पानी पीकर निकला है।

🔥 कहानी शुरू:

"अरे, अमन! जरा वो कोना तो देख ले, कहीं सेल्फी लेने में मस्त न रह जाओ।" राधिका ने झाड़ू रोककर कहा। उसकी आवाज़ में एक नटखट मिजाज था, जो पसीने से तरबतर ब्लाउज के साथ मिलकर और भी गर्माहट भरा लग रहा था। अमन की नज़र उसके झुकते हुए शरीर पर टिक गई। सफेद ब्लाउज पसीने से पारदर्शी हो रहा था और उसके भारी स्तनों के निप्पलों का उभार साफ दिख रहा था। वह गला सूख गया।

"चाची, आप तो खुद… काम में मस्त हैं।" अमन ने दबी हुई हँसी छोड़ते हुए कहा। वह एक कदम और पास गया। राधिका फिर से झाड़ू चलाने लगी, पर उसकी हरकतें अब अजीब थीं। जैसे वह जानबूझकर अपने चुतड़ों को हिला-हिलाकर उसकी नज़रों का निमंत्रण दे रही हो। अचानक, एक तेज झटका लगा। राधिका का ब्लाउज, जो पहले से ही तनाव झेल रहा था, उसके दाहिने स्तन के पास का बटन टूटकर दूर जा गिरा। "आह!" वह चौंककर सीधी खड़ी हो गई।

उसकी चूची का एक हिस्सा, गोलाई लिए हुए, ब्लाउज के खुले हुए हिस्से से बाहर झाँक रहा था। गुलाबी, तनी हुई त्वचा। अमन की सांस अटक गई। वह कुछ बोल नहीं पाया। राधिका ने शर्म से अपने हाथ से उस जगह को ढकना चाहा, पर उसकी उंगलियाँ उसी निप्पल के आसपास फिसलती रह गईं। उसकी आँखें अमन से मिलीं। उनमें शर्म नहीं, एक अजीब सी चमक थी। एक लंबी खामोशी छा गई। बस पंखे की आवाज और दोनों की तेज होती सांसें।

अमन की निगाहें उस गुलाबी उभार से हट नहीं पा रही थीं। राधिका का हाथ अब भी उस जगह पर था, पर ढकने के बजाय उसकी उंगलियाँ निप्पल के चारों ओर घूम रही थीं, एक अनजाने दबाव में। "ये…ये बटन…" वह फुसफुसाई, पर उसकी आवाज़ दम तोड़ गई। अमन ने एक और कदम बढ़ाया। अब उनके बीच महज एक हाथ की दूरी थी। उसकी सांसों की गर्मी राधिका की गर्दन को छू रही थी।

"चाची… कोई नया बटन लगा दूं?" अमन का स्वर भारी, खिंचा हुआ था। उसने अपना हाथ उठाया, और बिना छुए, उस खुले हुए ब्लाउज के किनारे पर उंगली फेरने का नाटक किया। कपड़ा पसीने से चिपचिपा था। राधिका ने एक गहरी सांस भरी, जिससे उसके स्तन और भी उभरकर सामने आए। "तुम… तुम्हें दिखाई दे रहा है ना सब?" उसने आँखें नीची करते हुए कहा, एक नखरे भरा इनकार।

"हाँ," अमन ने सीधा जवाब दिया। "बहुत कुछ दिख रहा है।" उसकी उंगली अब कपड़े के किनारे को हटाकर, सीधे उसके निप्पल के पास की त्वचा पर आ गई। एक हल्का, बिजली सा स्पर्श। राधिका के शरीर में एक झटका दौड़ गया। उसने अपनी आँखें बंद कर लीं, और उसके होंठों से एक मद्धम कराह निकल पड़ी। "अमन…"

वह नाम उसके मुँह से निकला तो जैसे सात साल की प्यास फूट पड़ी। अमन ने हिम्मत बटोरी। उसकी उंगली ने उस गुलाबी निप्पल के उभार को हल्के से चूमा, सिर्फ एक स्पर्श। राधिका का शरीर काँप उठा। उसने अपना हाथ अमन की कलाई पर रख दिया, लेकिन धकेलने के बजाय, उसे वहीं दबोच लिया। एक साफ़ इजाज़त।

अमन ने अब पूरा हथेली उसके भरे हुए स्तन पर रख दी। गर्मी, नमी और एक जबर्दस्त कोमलता। उसने धीरे से दबाया। राधिका की सांस तेज हो गई। उसने अपना सिर अमन के कंधे पर टिका दिया, अपने चुतड़ों को अनजाने में पीछे करते हुए, जो अमन की जांघों से टकराए। "ऐसे नहीं… अंदर… अंदर चलो," वह हाँफती हुई बोली।

पर अमन अभी और यहीं रुकना चाहता था। उसने अपना दूसरा हाथ उसकी कमर पर लपेटा और उसे अपने पास खींच लिया। अब उनके पेट एक दूसरे से सटे हुए थे। उसने अपने होंठ राधिका के कान के पास लाए। "चाची, ये चूची… पसीने में नहाती हुई… बिल्कुल चूमने जैसी लग रही है।" उसकी गर्म सांसों ने राधिका को और व्याकुल कर दिया।

राधिका ने अपनी आँखें खोलीं। उनमें वासना का एक सागर उमड़ रहा था। उसने अमन का हाथ, जो उसके स्तन पर था, अपने हाथ से दबाया, उसे और जोर से सहलाने के लिए उकसाया। "तुम शहर में यही सब सीखकर आए हो?" उसने एक तीखी, पर कामुक हंसी हँसी। उसकी उंगलियाँ अमन के हाथ की पीठ पर नाचने लगीं।

"नहीं," अमन ने उसके होंठों के बिल्कुल पास से फुसफुसाया, "ये तो गाँव की भूख है, चाची। तुम्हारे अंदर दबी हुई आग मेरे अंदर की भूख से मिल रही है।" इतना कहकर उसने आखिरकार उसके निप्पल को अपने अंगूठे और तर्जनी के बीच लेकर हल्का सा खींचा। राधिका चीखने ही वाली थी कि उसने अपने होंठ दबा लिए, पर उसकी कराह बरामदे की गर्म हवा में घुल गई। उसकी पीठ एक अजीब आर्च में उभर आई, अपने स्तन को और अमन की हथेली में झोंक दिया। झाड़ू दूर जाकर गिरी हुई थी, और पंखा अब बेअसर था। दोनों के शरीर से निकलती गर्मी ही अब कमरा गर्मा रही थी।

अमन के निप्पल खींचने से उपजी कराह के बाद, राधिका का शरीर एकदम नरम पड़ गया, फिर तुरंत ही एक नई तनाव से भर उठा। उसने अमन की कलाई पकड़ी और उसके हाथ को अपने ब्लाउज के अंदर, सीधे गर्म त्वचा पर ले आई। "बस… इतने से संतोष कर लोगे?" उसने फुसफुसाते हुए कहा, उसकी सांसें अमन के गले में टकरा रही थीं।

अमन की उंगलियों ने उस मखमली चूची का पूरा आकार टटोला। निप्पल कड़ा होकर उभरा था, जो उसकी हथेली में एक गर्म बिंदु सा महसूस हो रहा था। उसने धीरे से मरोड़ा। राधिका ने अपना सिर पीछे झटका, उसकी गर्दन की नसें तन गईं। "अंदर… ले जाओ मुझे," वह बार-बार हाँफती रही, पर अमन अब नियंत्रण में आना नहीं चाहता था।

उसने अपना दूसरा हाथ उसकी गांड पर फेरा, उन भारी चुतड़ों को कसकर दबोचते हुए। कपड़ा पतला था और गर्म मांस उंगलियों के नीचे दब रहा था। "पहले इस चूची का स्वाद तो लेने दो, चाची," अमन बोला और झुककर उसके कंधे पर पड़े पसीने की बूंदों को चाटता हुआ, धीरे-धीरे उसकी गर्दन के कर्व की ओर बढ़ा। राधिका ने अपनी आँखें बंद कर लीं, उसके होंठ काँप रहे थे।

वह उसकी कॉलरबोन तक पहुँचा, फिर नीचे, उस खुले हुए ब्लाउज के किनारे तक। उसकी नाक उसके स्तन की गर्मी में घुस गई। उसने उस गुलाबी निप्पल के चारों ओर गर्म हवा फेंकी। राधिका का पूरा धड़ एक झटके में उभर आया, उसने अमन के बालों में अपनी उंगलियाँ घोंप दीं, उसे और दबाकर अपने सीने की ओर खींचा। "चाट… चाट इसे," उसकी आवाज़ एक गुहार बनकर रह गई।

अमन ने होंठों से उस निप्पल को छुआ। पहले एक हल्का स्पर्श, फिर जीभ से एक लंबी, धीमी रेखा खींची। नमकीन पसीने और एक मीठी, औरत की गंध का मेल। राधिका की कराह एक लंबी सिसकी में बदल गई। उसने अमन का सिर अपने स्तनों के बीच दबा लिया, जबकि उसकी जांघें बेचैन होकर रगड़ खाने लगीं। अमन ने पूरा मुँह भरकर उसकी चूची चूसी, एक लयबद्ध खिंचाव के साथ, जैसे कोई रस निकाल रहा हो।

"और… दूसरी वाली भी," राधिका ने उसके कान में कहा, अपने हाथों से ब्लाउज के बचे हुए बटन खोलते हुए। कपड़ा दोनों तरफ खुल गया। अब दोनों भारी, लटकते स्तन पूरी तरह बाहर थे, गुलाबी निप्पल हवा में काँप रहे थे। अमन ने एक से दूसरे पर मुँह फेरा, चूसना, दांतों से हल्का काटना, जीभ से निप्पल के चारों ओर चक्कर लगाना। राधिका की हाँफने की आवाज़ तेज होती जा रही थी।

उसकी उंगलियाँ अमन के शर्ट के बटन तलाशने लगीं। "इतना कपड़ा… क्यों है?" वह व्यग्रता से बुदबुदाई। उसने पहला बटन खोला, फिर दूसरा, उसकी उंगलियाँ उसके सीने के बालों में फिसलने लगीं। अमन ने उसे रोका नहीं। वह उसकी कमरबंद खोलने लगी, जबकि अमन का मुँह अब उसके पेट पर था, नाभि के ऊपर गीले चुंबन देता हुआ।

राधिका ने अमन के पैंट का बटन खोल दिया। जिप की आवाज़ ने बरामदे की खामोशी तोड़ी। उसकी हथेली ने उसके अंडरवियर के ऊपर से उभार को महसूस किया। "अरे राम… ये तो…" उसकी आँखें चौंधिया गईं। उसने पूरा हाथ अंदर डाला, उस गर्म, कड़े लंड को मुट्ठी में ले लिया। अमन ने एक गहरी सांस खींची, उसकी चूची चूसना जारी रखते हुए।

"चलो अब," राधिका का स्वर भर्रा गया, "बरामदे में नहीं… बिस्तर पर।" पर उसकी मुट्ठी उसे जाने नहीं दे रही थी, उपर-नीचे होने लगी। अमन ने उठकर उसे चूमा, एक गहरा, लंबा चुंबन जिसमें सात साल की भूख समाई थी। उनके होंठों का खेल गीला और बेकाबू था। अमन ने उसे उठाकर भीतर की ओर ढकेलना शुरू किया, पर रास्ते में ही उसकी साड़ी की चुन्नट खोल दी। कपड़ा ढीला होकर उसके चुतड़ों के ऊपर लटक गया। अमन का हाथ सीधे उसकी नंगी गांड पर जा पहुंचा, उसके मुलायम मांस को अपनी उंगलियों में दबोच लिया।

अमन के हाथ के दबाव से राधिका का शरीर और अधिक उसकी ओर झुक गया। उसने अपनी उंगलियाँ उसके मुलायम मांस में और गहरे धँसा दीं, एक तरफ से दूसरी तरफ सरकते हुए। "चाची के ये चुतड़… कितने मीठे हैं," उसने उसके कान में गुर्राया। राधिका की सांस फूलने लगी, उसने अमन की पैंट के अंदर अपनी मुट्ठी और तेज चलाई, लंड की गर्मी उसकी हथेली को जलाती हुई।

वे बरामदे से लड़खड़ाते हुए अंदर के कमरे की ओर बढ़े। राधिका की साड़ी अब पूरी तरह ढीली होकर कमर पर लटक रही थी। अमन ने उसे दीवार से सटा दिया, उसके नंगे स्तन अपने सीने से दबाए। उनके बीच का पसीना एक चिपचिपा, गर्म सेतु बन गया। "पहले यहाँ… थोड़ा और," राधिका हाँफी, उसकी जांघें अमन की जांघों के बीच घिसटने लगीं, उसके लंगोट में कड़े उभार को रगड़ती हुई।

अमन ने उसकी गांड पर लगे हाथ को आगे सरकाया, उसकी साड़ी की पेटीकोट के ऊपरी किनारे पर उंगलियाँ डालीं। वह नीचे सरककर उसके पेट पर चुंबन देने लगा, नाभि के गड्ढे में जीभ घुमाते हुए। राधिका ने अपना सिर पीछे की दीवार पर टिका दिया, आँखें बंद करके उस स्पर्श को महसूस किया। "अंदर… पेटीकोट… उतार दो," वह व्याकुल स्वर में बोली।

अमन ने उसकी आज्ञा का पालन किया। उसने अपने दांतों से पेटीकोट का कपास पकड़ा और नीचे की ओर खींचा। कपड़ा उसकी जांघों पर से सरकता हुआ नीचे गिरा। अब केवल एक गीला, पतला सूती चड्डी बची थी, जो उसके भारी चुतड़ों और गीले बालों के उभार को छुपाने की नाकाम कोशिश कर रही थी। अमन की नजर वहीं अटक गई। उसने अपना हाथ उस नम कपड़े पर रखा और हल्का सा दबाया। राधिका ने एक तीखी सिसकारी भरी।

"ये… ये चूत भी तो देख लो," उसने अमन के बालों में उंगलियाँ फंसाते हुए कहा, उसका सिर नीचे, अपनी ओर खींचा। अमन घुटनों के बल बैठ गया। उसने अपने गालों से उसकी जांघों के भीतरी हिस्सों को सहलाया, गर्म सांसें उसके अंतरंग अंगों तक पहुँचाईं। चड्डी का गीला धब्बा और बड़ा होता दिख रहा था। उसने अपने दांतों से कपड़े का किनारा पकड़ा और इसे धीरे-धीरे नीचे खींचना शुरू किया।

राधिका के चुतड़ों का मांसल भार चड्डी के साथ-साथ हिला। जैसे ही कपड़ा उसके घुटनों तक आया, अमन ने सब कुछ रोक दिया। उसने अपने हाथों से उसके दोनों चुतड़ों को फैलाया, गहरे गुलाबी रंग की झुर्रीदार चूत को देखा, जो पसीने और उत्तेजना से चमक रही थी। "सुंदर…" वह बुदबुदाया।

फिर उसने जीभ से एक लंबा, धीमा स्ट्रोक किया, ऊपर से नीचे तक। राधिका का शरीर दीवार के सहारे ढल गया, उसकी एक जोरदार कराह कमरे में गूंज उठी। "ओह! फिर से… फिर से करो," उसने गिड़गिड़ाते हुए कहा। अमन ने जीभ को और गहराई में डाला, उसके तंग छिद्र के चारों ओर चक्कर लगाते हुए, फिर उसके सूजे हुए भगशेफ को चूसना शुरू किया। राधिका की जांघें काँपने लगीं, उसने अमन का सिर अपने चुतड़ों के बीच कसकर पकड़ लिया, उसकी जीभ के हर हरकत पर अपनी चूत को थिरकने दिया।

"बस… बस अब लेट जाओ," वह लगभग रोती हुई बोली। अमन उठ खड़ा हुआ, उसके होंठ गीले और चमकदार थे। उसने राधिका को बिस्तर की ओर मोड़ा, जो कमरे के कोने में पड़ा था। रास्ते में ही उसने अपनी शर्ट और पैंट उतार फेंके। राधिका ने लेटते ही अपने ऊपर से बची हुई साड़ी और ब्लाउज को उतार दिया, पूरी तरह नग्न होकर चादर पर अपने भारी स्तन और चौड़े चुतड़ फैला दिए। उसकी नजरें अमन के कड़े, भारी लंड पर टिकी थीं, जो हवा में लहरा रहा था।

अमन बिस्तर पर चढ़ा और उसके ऊपर आ गया, अपने वजन को कोहनियों पर संभालते हुए। उसने अपने लंड के सिरे को उसकी चूत के नम द्वार पर रगड़ा, इधर-उधर घुमाया, पर अंदर नहीं डाला। "क्या चाहती हो, चाची?" उसने शैतानी मुस्कान के साथ पूछा।

"तुम्हारा सब कुछ… अंदर… पूरा," राधिका ने अपनी एड़ियों से उसकी पीठ के निचले हिस्से को खींचते हुए कहा। अमन ने धीरे से दबाव डाला। गर्म, तंग नमी ने उसे निगलना शुरू किया। राधिका की आँखें फटी की फटी रह गईं, उसके मुँह से एक लंबी, रुकी हुई साँस निकली जैसे सात साल की जकड़न टूट रही हो। अमन ने पूरा अंदर जाने से पहले रुक गया, केवल आधा लंड ही अंदर था। उसने झुककर उसके निप्पलों को चूसा, एक के बाद एक।

"और… पूरा, अमन, मैं माँगती हूँ," राधिका ने गिड़गिड़ाया। तभी अमन ने एक झटके में अपने कूल्हे आगे किए। राधिका की चीख गद्दे में दब गई। उसकी बाहें अमन की पीठ से चिपक गईं, नाखूनों के निशान बनाते हुए। धीमी, गहरी धक्केबाजी शुरू हुई, हर धक्के के साथ बिस्तर की चरचराहट और दोनों के मिले-जुले कराहों की आवाज़ भरी।

अमन के धक्के गहरे और मापे हुए थे, हर बार पूरी लंबाई निकलकर फिर से उसकी चूत की गर्म गहराई में समा जाते। राधिका की आँखें उसके चेहरे पर चिपकी थीं, उसकी हर मांसपेशी के खिंचाव को पढ़ती हुई। "तेज़… अब तेज़ करो," वह हाँफते हुए बोली, उसकी एड़ियाँ उसकी कमर पर और गहरे दब गईं। अमन ने गति बढ़ाई, उसके चुतड़ों के मांसल टकराव से गद्दे की चरचराहट तेज हो गई।

उसने एक हाथ उसकी गांड के नीचे सरकाया, उसे थोड़ा ऊपर उठाते हुए, ताकि हर धक्का एक नए कोण से लगे। राधिका की कराहें लगातार और बेसुरी होती गईं। "हाँ… ठीक वहाँ… ओह, बेटा!" उसके मुँह से निकला 'बेटा' शब्द दोनों के कानों में एक अलग ही कामुकता भर गया। अमन ने झुककर उसके होंठों को निगल लिया, उसकी जीभ उसके मुँह में घुसपैठ करते हुए उसकी हर कराह को चूस लेती।

फिर उसने उसे पलट दिया, बिना अपने अंग को बाहर निकाले। राधिका पेट के बल लेट गई, उसके भारी स्तन चादर पर दबे हुए। अमन ने उस पर सवार होकर, उसकी कमर के नीचे हाथ डालकर उसके चुतड़ों को उठाया। इस नई पोजीशन में उसकी चूत और तंग लग रही थी। "चाची, तुम्हारी गांड तो देखो… कितनी भरी हुई है," उसने कहा और एक जोरदार धक्का दिया। राधिका का चेहरा तकिए में दब गया, उसकी चीख मफल हो गई।

उसने अपने एक हाथ से उसके चुतड़ों को अलग किया, दूसरे हाथ से उसकी कमर को कसकर पकड़ा। हर धक्के के साथ, उसकी चूत का गीला आवाज़ उभर रहा था। राधिका ने पीछे मुड़कर देखा, उसकी नजरों में एक विनम्र वासना थी। "मारो… और जोर से मारो," वह फुसफुसाई। अमन ने उसकी बात मानी, उसके चुतड़ों पर जोरदार थप्पड़ लगाया। लाल निशान उभर आए और राधिका की चूत एक नई ऐंठन के साथ सिकुड़ी।

वह फिर से उसे पलटकर पीठ के बल लेटा दिया। उसके चेहरे पर पसीना चमक रहा था। अमन ने उसकी टांगों को अपने कंधों पर रख लिया, उसे और गहराई तक मोड़ दिया। इस स्थिति में हर धक्का सीधा उसकी गहराई में जा रहा था। राधिका के हाथ चादर को मुट्ठियों में भींच रहे थे। "मैं… मैं जल्दी आ जाऊंगी," वह चेतावनी देती हुई हाँफी।

"नहीं, अभी नहीं," अमन ने शैतानी अंदाज में कहा और गति फिर से धीमी कर दी। वह लगभग रुक गया, केवल अपने लंड के सिरे को हल्के-हल्के घुमाते हुए। राधिका व्याकुल हो उठी, उसकी एड़ियाँ उसकी पीठ को थपथपाने लगीं। "अब नहीं रुको… कृपया!"

अमन ने उसकी इस हालत का मजा लिया। उसने झुककर उसके कान में कहा, "कहो… मेरा क्या नाम है?" राधिका की आँखें मिचमिचाईं। "अमन… तुम अमन हो," उसने कहा। "नहीं, अभी नहीं। अभी तो मैं वो हूँ जो तुम्हारे अंदर की आग को शांत कर रहा हूँ।" इतना कहकर उसने एक बार फिर तेज, गहरे धक्के शुरू कर दिए। राधिका का शरीर तनाव से कड़ा हो गया, उसकी सांसें छोटी-छोटी और तेज हो गईं।

उसकी चूत में एक तेज सिकुड़न शुरू हुई। अमन ने इसे महसूस किया और अपनी गति और तीव्र कर दी। राधिका का सिर पीछे की ओर झटका, उसकी आँखें पलकों के पीछे घूम गईं। एक लंबी, दबी हुई चीख के साथ उसका शरीर एकाएक ढीला पड़ गया, हर अंग काँप रहा था। उसकी चूत की मरोड़ अमन के लंड को और भी निगलने लगी।

यह देखकर अमन का नियंत्रण टूट गया। उसने उसके चुतड़ों को कसकर पकड़ा और अपने कूल्हे जोर से आगे किए, एक के बाद एक, जब तक कि उसे भी एक गहरी, स्खलन की लहर ने नहीं घेर लिया। वह गर्दन तानकर कराहा, अपना सारा वीर्य उसकी गर्मी के भीतर खाली करते हुए। उसका शरीर राधिका पर भारी पड़ गया।

कुछ देर तक सिर्फ सांसों की आवाज़ थी। फिर राधिका के हाथ उसकी पीठ पर सहलाने लगे। "सात साल…" वह फुसफुसाई, "सात साल की जकड़न… एक पल में टूट गई।" अमन ने अपना सिर उसके स्तनों के बीच दबा दिया, अभी भी उसके अंदर आधा नरम पड़ा हुआ था। चादर उनके पसीने और दूसरे तरल पदार्थों से सनी हुई थी। बाहर का पंखा अब भी घूम रहा था, पर उसकी हवा उनकी गर्मी के आगे फीकी थी।

राधिका की उंगलियाँ अमन की पीठ पर बिखरे पसीने में रास्ता बनाती हुईं, नीचे उसके कूल्हों की ओर सरक गईं। उसकी सांसें अभी गहरी और लयबद्ध थीं, पर शरीर की गर्मी कम नहीं हुई थी। अमन ने अपना चेहरा उसके स्तनों के बीच से हटाया और ऊपर देखा। राधिका की आँखें अर्ध-बंद थीं, पर उनमें एक नई, आलसी चमक तैर रही थी। "थोड़ा सा… पानी," वह फुसफुसाई।

अमन उठा और कमरे के कोने में रखा मटका देखा। वह नंगा ही उठ खड़ा हुआ, उसकी जांघें चिपचिपी थीं। उसने मटके से पानी भरा और वापस बिस्तर पर आकर राधिका के पास बैठ गया। राधिका ने अपने कोहनी के बल उठकर उसके हाथ से ही पानी पिया, उसकी उंगलियों को अपने होंठों से छुआ। पानी की कुछ बूँदें उसकी ठुड्डी से होती हुई, उसके स्तनों के बीच की घाटी में गिरीं। अमन की नज़र उन बूँदों पर टिक गई, जो उसकी त्वचा पर नम रास्ते बना रही थीं।

"अब तुम पियो," राधिका ने कहा और उसने मटका अपने हाथ में ले लिया। अमन ने पानी पिया, पर उसकी आँखें राधिका के चेहरे पर थीं। राधिका ने बचा हुआ पानी अपने हाथ पर डाला और अचानक अमन के सीने पर फेर दिया। ठंडे पानी का झटका लगते ही अमन की साँस फूल गई। राधिका ने अपना हथेली उसके सीने पर घुमाया, पानी और पसीने को मिलाते हुए। फिर वह नीचे सरकी, उसके पेट तक, और उसकी नाभि के आसपास गोल-गोल घूमने लगी।

अमन ने एक गहरी सांस खींची। राधिका की उंगलियाँ अब उसके कमर के नीचे जा रही थीं, उसके जांघों के अंदरूनी हिस्से को छू रही थीं, जहाँ चिपचिपाहट अभी भी ताज़ा थी। "चाची…" उसकी आवाज़ में फिर से वही खिंचाव लौट आया था।

"हाँ, बेटा?" राधिका ने नटखट अंदाज़ में कहा, उसकी उंगली अब उसके नरम पड़े लंड के आधार पर हल्के से खेल रही थी। "सात साल की भूख… एक बार में शांत हो जाएगी क्या?" उसने अपना चेहरा उसके जांघों के पास ला दिया और उसकी गर्म सांसें उसकी त्वचा पर महसूस होने लगीं।

अमन का शरीर फिर से प्रतिक्रिया देने लगा। राधिका ने इसे महसूस किया और एक मुस्कान उसके होठों पर खेल गई। उसने अपनी जीभ से उसके लंड के सिरे पर एक हल्का, गीला स्पर्श किया, बस एक झलक देकर हट गई। अमन की जांघ की मांसपेशियाँ तन गईं। "ऐसे छेड़ोगी?" उसने कहा और उसके बालों में हाथ फेरते हुए उसे अपनी ओर खींचा।

राधिका ने आसानी से अपना सिर आगे किया और इस बार पूरा सिरे को अपने मुँह में ले लिया। एक लंबी, धीमी चूसने की क्रिया, जिसमें उसकी जीभ नीचे के नाजुक हिस्से पर घूम रही थी। अमन ने आँखें बंद कर लीं, उसके सिर को प्यार से सहलाया। राधिका की तकनीक अनाड़ी नहीं, बल्कि एक सहज लय में थी, जैसे शरीर की भाषा को वर्षों बाद फिर से याद कर रही हो।

कुछ देर बाद वह ऊपर आई और अपने घुटनों के बल बैठ गई। उसके भारी स्तन हवा में हिल रहे थे, निप्पल अभी भी गहरे गुलाबी और उभरे हुए। "अब मैं ऊपर," उसने कहा, और अमन के ऊपर सवार हो गई। वह धीरे से नीचे बैठी, उसके लंड को अपनी अभी भी नम और संवेदनशील चूत में धीरे-धीरे समेटते हुए। दोनों की एक साथ कराह निकली। इस पोजीशन में राधिका का नियंत्रण था। उसने अपने हाथ अमन के सीने पर टिकाए और धीमी, गोलाकार गति में अपने कूल्हे घुमाने लगी। उसकी आँखें अमन की आँखों में घुसी हुई थीं, हर संवेदना को साझा कर रही थीं।

"देखो," वह हाँफी, "तुम्हारी चाची… कैसे तुम्हें चलाती है।" उसने गति बढ़ाई, ऊपर-नीचे का मूवमेंट अब और तेज हो गया। उसके चुतड़ों का मांस हर बार जोर से टकरा रहा था। अमन के हाथ उसकी कमर पर चिपक गए, उसे गति देने में मदद करते हुए। कमरे में फिर से वही आवाज़ें गूंजने लगीं – गीले स्पर्श की आवाज़, चादर की सरसराहट, और दोनों के मिले-जुले, भारी स्वर।

राधिका की गति एक उन्मादी लय पकड़ चुकी थी। उसके शरीर से टपकता पसीना अमन के पेट पर गिर रहा था, हर उछाल के साथ एक गीला छपाक सुनाई देता। "और… और तेज़," वह खुद को उसके लंड पर और जोर से गिराते हुए कराही। अमन ने उसकी कमर को पकड़कर उसे नीचे की ओर झटका दिया, हर बार गहराई तक पहुँचते हुए। उसकी चूत की गर्म, चिपचिपी चुंबन की आवाज़ कमरे में गूंज रही थी।

अमन ने बैठने का प्रयास किया, राधिका को अपनी गोद में बिठा लिया। इस नई स्थिति में उनका सीना आपस में जकड़ गया। अमन के होंठ उसके निप्पलों से चिपक गए, चूसते हुए, जबकि राधिका की बाँहें उसकी गर्दन के चारों ओर लिपटी थीं। वह ऊपर-नीचे होती रही, पर अब उसकी गति में एक बेकाबू जल्दबाजी थी। "मैं नहीं रोक पा रही… अमन, मैं आ रही हूँ!" उसने चीखते हुए कहा, उसकी चूत में एक तीव्र सिकुड़न शुरू हो गई, जैसे कोई गर्म मुट्ठी बार-बार कस रही हो।

अमन ने उसे और कसकर अपने में समेटा, उसके कूल्हों को दबोचते हुए उसे अपने ऊपर रोक लिया। "रुको… मेरे साथ," वह गुर्राया, उसका अपना शरीर भी सीमा पर पहुँच चुका था। उसने एक हाथ उसकी गांड के बीच सरकाया और उसके गुदा के छिद्र के आसपास उंगली फेरी। राधिका का शरीर एक नए कंपन से भर गया। "वहाँ… नहीं… हाँ!" उसकी आवाज़ टूट रही थी।

उसकी उंगली ने हल्का दबाव डाला, बस इतना कि राधिका की समस्त इंद्रियाँ एक साथ फट पड़ीं। एक जोरदार, लंबा झटका उसके शरीर से गुजरा, उसकी चीख दबी हुई और लरजती हुई निकली। उसकी चूत ने अमन के लंड को ऐसे जकड़ लिया जैसे जीवनदान दे रही हो। यह देखकर अमन का संयम टूट गया। उसने उसे चादर पर लिटा दिया और अपने कूल्हे जोर से आगे किए, एक अंतिम, गहरी धक्का-मुक्की में खुद को उसकी गहराई में उड़ेल दिया। उसका सिर पीछे झटका, गर्दन की नसें तन गईं, और एक गद्गद् कराह के साथ उसका वीर्य उसके भीतर स्खलित हो गया, गर्म धाराओं की लहरें भेजते हुए जो राधिका के कंपन को और बढ़ा गईं।

दोनों के शरीर ऐंठन में थे, फिर धीरे-धीरे ढीले पड़ते चले गए। अमन का वजन उस पर टूट पड़ा, पर राधिका ने उसे गले लगा लिया। कुछ मिनटों तक सिर्फ दो टूटी-फूटी सांसों की आवाज थी, जो धीरे-धीरे सामान्य होने लगीं। बिस्तर उनके मिले-जुले तरल से भीग चुका था।

थोड़ी देर बाद अमन ने खुद को उससे अलग किया और करवट लेकर लेट गया। राधिका ने तुरंत उसकी बाँह पर सिर रख दिया, उसकी नम पीठ पर अपनी हथेली फेरने लगी। "सात साल…" वह फुसफुसाई, आवाज़ में एक अजीब शांति, "लगता था कभी नहीं भर पाऊंगी उस खालीपन को।" उसकी आँखों से आँसू नहीं, बल्कि एक गहरी, थकी हुई तृप्ति टपक रही थी।

अमन ने उसकी ओर मुड़कर देखा। उसके चेहरे पर चाची का वह आवरण पूरी तरह गायब था; अब वह सिर्फ एक औरत थी। उसने उसके गाल पर हाथ फेरा। "अब क्या होगा, चाची?"

राधिका ने एक गहरी सांस ली, उसकी नजरें खिड़की से बाहर अंधेरी शाम पर टिक गईं। "कल सुबह मैं वही राधिका बन जाऊंगी, और तुम वही अमन। यह… यह इसी कमरे में दफन रहेगा।" उसकी आवाज़ में एक वर्जित कड़वाहट थी, पर उसके होंठों पर एक मंद मुस्कान भी थी। "लेकिन आज की भूख… शांत हो गई है।"

उसने अमन का हाथ पकड़कर अपने स्तन पर रख दिया, बस स्पर्श के लिए। बाहर से टेढ़े-मेढ़े आम के पेड़ की शाखाएँ खिड़की से झाँक रही थीं। पंखे की आवाज फिर से सुनाई देने लगी थी। दोनों बिना कुछ और कहे, उस गर्मी, उस गंध और उस शांति में लिपटे, धीरे-धीरे नींद के आगोश में समाते चले गए। अंतिम बार राधिका के होंठ हिले, "शुक्रिया, बेटे," पर आवाज इतनी धीमी थी कि शायद उसने खुद भी नहीं सुनी।


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