शादी की पहली रात, जब दूल्हा नशे में बेहोश पड़ा था, उसका सबसे अच्छा दोस्त कमरे में दाखिल हुआ। नई दुल्हन अंजलि का लहंगा उतर चुका था, उसकी चूचियों के निप्पल काँप रहे थे। वह दरवाज़े की चौखट पर खड़े विकास को देखकर सिहर गई, जिसकी नज़रें उसके स्तनों पर चिपकी थीं। "अमित को नींद आ गई," विकास ने कहा, उसकी आवाज़ में एक खिंचाव था, "मैं तुझे कंबल देने आया हूँ।" अंजलि ने अपने चुतड़ों को कसते हुए कंबल पकड़ा, उसकी उंगलियाँ उसकी उंगलियों से छू गईं। एक गर्माहट दोनों के बीच बहने लगी।
विकास की नज़रें अंजलि के पेट पर टिक गईं, जहाँ लहंगे की चुन्नट खुली हुई थी। अंजलि ने अपनी गांड को थोड़ा मोड़ा, उसे पता था कि वह उसे देख रहा है। "तुम…तुम जाओ," उसने कहा, लेकिन उसकी आवाज़ में एक नटखट कमज़ोरी थी। विकास ने एक कदम आगे बढ़ाया। "तू डर रही है?" उसने पूछा, उसकी साँसें तेज़ हो गईं। अंजलि ने हाँ में सिर हिलाया, पर उसके होंठों पर एक मुस्कान थी। विकास ने उसकी बाँह पकड़ी, उसकी त्वचा गर्म थी। "तुझे पता है, अमित ने शादी से पहले ही कहा था कि तू मुझे पसंद करती है," विकास ने कान में फुसफुसाया। अंजलि की चूत में एक झुरझुरी दौड़ गई। उसने मना नहीं किया।
वह उसके करीब आया, उसके स्तनों को अपनी छाती से दबाया। अंजलि की कराह निकल गई। "यहाँ मत…कोई आ सकता है," उसने कहा, लेकिन उसने अपने होंठ उसके होंठों से जोड़ दिए। चुंबन में एक वासना भरी भूख थी। विकास ने उसकी चूची को अपनी हथेली में लिया, निप्पल को अँगुलियों से मरोड़ा। अंजलि ने उसके लंड को अपनी जांघों के बीच महसूस किया, वह सख्त और गर्म था। "पहली रात…तू मेरी होगी," विकास ने गुर्राते हुए कहा। बाहर चाँदनी में, किसी के कदमों की आहट सुनाई दी। दोनों जम गए, उनकी साँसें रुकी रह गईं। खिड़की से एक पत्ता गिरा। विकास ने अंजलि को दीवार से दबा दिया, उसकी जांघ उसकी जांघों के बीच फंस गई। "चुप रह," उसने कहा। अंजलि की आँखों में डर और उत्तेजना का मिश्रण था। वह जानती थी कि यह गलत है, पर उसका शरीर सब कुछ भूल चुका था। विकास का हाथ उसके लहंगे के अंदर सरक गया, उसकी चूत की गर्माहट को छूने ही वाला था कि दरवाज़े पर दस्तक हुई। "भाभी, अमित भैया को पानी चाहिए," एक बच्चे की आवाज़ आई।
अंजलि की साँस थम गई। विकास का हाथ उसके लहंगे के अंदर से ठिठक गया, उसकी उंगलियों की गर्माहट अभी भी उसकी जांघ के कोमल मांस को छू रही थी। "जल्दी करो," विकास ने उसके कान में दबी आवाज़ में कहा, "जवाब दो।" अंजलि ने गले से आवाज़ निकाली, "थोड़ी देर में लाती हूँ।" बाहर कदमों की आहट दूर हो गई। विकास ने उस पर से दबाव हटाया नहीं, बल्कि उसकी जांघों के बीच अपना लंड और जोर से दबाया। अंजलि की आँखें बंद हो गईं, एक लंबी, काँपती साँस उसके होंठों से निकली।
"वो चला गया," विकास ने कहा, उसका हाथ फिर से उसके लहंगे के अंदर सरकने लगा। इस बार उसकी उंगलियाँ सीधे उसकी चूत की गीली गर्मी को छू गईं। अंजलि ने अपना माथा उसकी छाती पर टिका दिया, एक मद्धम कराह उसके गले से निकलकर कमरे की हवा में घुल गई। विकास ने उसकी चूत के ऊपरी होंठ को अँगुलियों से दबोचा, हल्के से मरोड़ा। "कितनी गीली हो गई है तू," उसने फुसफुसाया, "अमित का नशा उतरने तक तो तू पूरी फट चुकी होगी।"
अंजलि ने कोई जवाब नहीं दिया, उसके हाथ विकास की पीठ पर चले गए, उसकी कमीज को अपनी मुट्ठियों में भींच लिया। विकास ने उसके लहंगे की चुन्नट को और खोल दिया, उसका पूरा हाथ अब उसकी नंगी जांघ और कोमल चूत पर फैल गया। उसने अपना अंगूठा उसकी चूत के छेद के ऊपर घुमाया, दबाव डाला लेकिन अंदर नहीं घुसाया। अंजलि की टाँगें काँप उठीं। "ऐसे मत करो… सीधे करो," उसने हाँफते हुए कहा।
विकास ने उसे चूमा, उसके होंठों को चूसते हुए अपनी जीभ उसके मुँह में डाल दी। उसका दूसरा हाथ उसकी चूची पर वापस आया, निप्पल को बाँच की तरह नचाते हुए खींचा। अंजलि ने अपनी गांड को उसकी ओर धकेला, उसकी चूत का गीला छेद अब उसके अंगूठे से रगड़ खा रहा था। "पहले तुझे पूरी तरह से तैयार करना है," विकास ने उसके होंठ चूसते हुए कहा, "तुझे पता है, मैंने हमेशा सोचा था कि तेरी चूत कैसी होगी।"
उसने अपना हाथ नीचे खिसकाया, दो उंगलियाँ अंजलि की चूत के गीले प्रवेश द्वार पर जमा कर दीं। उसने धीरे से दबाव बनाया, अंदर घुसने का नाटक किया, फिर वापस खींच लिया। अंजलि ने उसके कंधे पर दाँत गड़ा दिए, उसकी एड़ियाँ फर्श पर खुद को धकेलने लगीं। "विकास… अब नहीं," उसकी आवाज़ रुँध गई, लेकिन उसके शरीर ने उल्टा संकेत दिया। उसकी चूत ने उसकी उंगलियों को अपनी गर्मी से आमंत्रित करते हुए सिकुड़न भरी।
विकास ने अचानक उसे घुमा दिया, उसका सामना दीवार से करा दिया। उसने उसके लहंगे को और ऊपर सरका दिया, अब अंजलि की नंगी गांड और गीली चूत पूरी तरह उसकी नज़रों के सामने थी। उसने अपनी हथेली उसकी गांड के गोलाकार गालों पर रखी, कसकर दबाई। "इतनी सख्त गांड," उसने कहा, "अमित ने कभी इसे ऐसे नहीं देखा होगा।" उसने अपना लंड, जो अब पूरी तरह से तन चुका था और अपनी पैंट से बाहर निकलने को बेकरार था, अंजलि की गांड की खाई में दबाया। कपड़े के बावजूद, गर्मी और दबाव ने अंजलि को एक तीखी कराह निकालने पर मजबूर कर दिया।
उसने अपना सिर पीछे झटका, उसकी चोटी खुल गई। विकास ने उसकी गर्दन को चूमना शुरू किया, नीचे से उसकी पीठ की रीढ़ तक, जबकि उसकी उंगलियाँ अब अंजलि की चूत के अंदर धीरे-धीरे प्रवेश करने लगीं। एक उंगली पहले, गीलेपन के कारण आसानी से। अंजलि के मुँह से एक लंबी, दबी हुई कराह निकली, उसकी उंगलियाँ दीवार पर खरोंचने लगीं। "और… दो," विकास ने गुर्राते हुए कहा, और दूसरी उंगली उसकी तंग चूत में उसकी बहन के साथ जुड़ गई। अंजलि का शरीर धनुष की तरह तन गया, उसकी चूत ने उन उंगलियों को जकड़ लिया। विकास ने उन्हें अंदर-बाहर चलाना शुरू किया, एक धीमी, गहरी गति, हर बार अंजलि की गहराई को छूते हुए। बिस्तर पर अमित की खर्राटों की आवाज़ के साथ, उंगलियों के गीले होने की आवाज़ एक अश्लील ताल बना रही थी।
विकास की उंगलियों की गति तेज़ हुई, अंजलि की चूत से चिपचिपी आवाज़ें निकलने लगीं। उसने अपना मुँह दीवार पर दबा लिया ताकि कराह न निकले, पर उसकी पीठ का हर मांसपेशी तनाव से काँप रहा था। विकास ने अपना दूसरा हाथ उसकी गांड की ओर सरकाया, उसके गोल चुतड़ों के बीच की गर्म खाई को महसूस किया। "तेरी गांड भी तो कम नहीं," उसने फुसफुसाया, अपना अंगूठा उसकी चूत के नीचे के संकरे छेद पर घुमाते हुए।
अंजलि ने अपनी आँखें मूंद लीं, विकास की उंगलियों के अंदर-बाहर होने के हर छूने से उसकी चूत में बिजली दौड़ जाती। उसने अपनी गांड को और पीछे धकेला, अनजाने में ही विकास के लंड को अपने नितंबों के बीच और जोर से रगड़ दिया। विकास की साँस फूलने लगी। "लगता है तुझे गांड से भी मज़ा आएगा," उसने कहा, अपना अंगूठा हल्का दबाते हुए।
"नहीं… वो नहीं," अंजलि ने हाँफते हुए कहा, लेकिन उसकी प्रतिक्रिया में विरोध का वह जोश नहीं था। विकास ने अपनी उंगलियाँ उसकी चूत से निकालीं और उन्हें अपने मुँह के सामने ले गया, चमकदार गीलापन चाँदनी में झिलमिला रहा था। "तेरा रस," उसने कहा, और जीभ से उंगलियाँ चाट लीं। अंजलि ने पलटकर देखा, उसकी आँखों में शर्म और उत्सुकता का एक अजीब मेल था।
विकास ने उसे फिर से अपनी ओर खींचा, इस बार उसके होंठों पर एक जबरदस्त, दावेदार चुंबन जड़ दिया। अंजलि ने उसकी जीभ का स्वाद महसूस किया-शराब का और अपने ही शरीर के रस का। उसके हाथ विकास के बालों में घुस गए, उसे और गहराई से चूमने के लिए खींचा। चुंबन के बीच, विकास ने उसकी चोली के फीते खोल दिए, और उसके भारी स्तन बाहर झरने लगे। उसने एक चूची को मुँह में ले लिया, निप्पल को जीभ से लपेटते हुए चूसना शुरू किया।
अंजलि का सिर पीछे को झटका, एक लंबी, दबी हुई कराह उसके गले से निकली। विकास का एक हाथ उसकी कमर पर सरक रहा था, लहंगे की कमरबंद को खोलते हुए। कपड़ा ढीला हुआ और अंजलि के कूल्हों पर सरक गया। वह अब लगभग नंगी थी, सिर्फ़ घुटनों के पास लटकता लहंगा और खुले बाल। विकास ने उसे थोड़ा पीछे धकेला, अपनी नज़रों से उसके पूरे शरीर का भोग लगाया-चूचियों के काँपते निप्पल, पसीने से चमकता पेट, और उस जगह जहाँ उसकी चूत गीली और खुली थी।
"दीवार से टिक जा," विकास ने आदतन कहा, अपनी पैंट का बटन खोलते हुए। अंजलि ने ऐसा ही किया, उसकी हथेलियाँ ठंडी दीवार पर फैल गईं। विकास ने अपना लंड बाहर निकाला, वह सख्त और नसों से भरा हुआ था। उसने उसे अपने हाथ में लिया, और अंजलि की गीली चूत के ऊपर रगड़ना शुरू किया, सिर को उसके निप्पल जैसे बिंदु पर टिकाया। अंजलि ने अपनी टाँगें और चौड़ी कीं, एक अनजाने आमंत्रण में।
"देख," विकास ने कहा, उसका सिर उसकी चूत के छेद से टकराया, लेकिन अंदर नहीं घुसा। "यह वो जगह है जहाँ तू मेरी होने वाली है।" उसने एक धक्का दिया, सिर्फ़ एक इंच अंदर, फिर रुक गया। अंजलि की साँस रुक गई, उसकी चूत ने उस मोटे सिरे को जकड़ लिया। उसने अपनी आँखें बंद कर लीं, पूरे शरीर में एक तीखा खिंचाव महसूस किया।
विकास ने उसके कान में फुसफुसाया, "बोल, तू मेरी चाहती है।" अंजलि ने हाँ में सिर हिलाया, शब्द नहीं निकल पा रहे थे। "ज़ोर से बोल," विकास ने दबाव बढ़ाते हुए कहा, एक और इंच अंदर सरकते हुए। अंजलि के मुँह से एक टूटी हुई आवाज़ निकली, "हाँ… विकास, हाँ।"
उसकी बात पूरी होते ही, विकास ने एक जोरदार, गहरा धक्का दिया, अपना पूरा लंड उसकी तंग, गीली चूत के अंदर उतार दिया। अंजलि का मुँह खुला रह गया, एक लंबी चीख उसके गले में अटक गई। उसकी उंगलियाँ दीवार पर खरोंचने लगीं, उसकी चूत में जलन और भराव का एक अद्भुत एहसास था। विकास ने एक पल रुककर उसे अभ्यस्त होने दिया, फिर धीरे-धीरे बाहर खींचा और फिर अंदर गया। हर धक्के के साथ, अंजलि की कराहें गहरी होती गईं, उसका शरीर उस रिदम में ढलने लगा। बिस्तर पर अमित करवट बदलकर सो गया। दोनों जम गए, केवल उनकी धड़कनों की तेज़ आवाज़ सुनाई दे रही थी। फिर विकास ने फिर से चलाना शुरू किया, इस बार और तेज़, और अंजलि ने अपना माथा दीवार पर टिका लिया, हर धक्के को अपने भीतर उतरते हुए महसूस किया।
विकास का लंड अंजलि की चूत में एक गहरी, निरंतर लय बनाते हुए अंदर-बाहर हो रहा था। हर धक्के के साथ उसके चुतड़ों पर एक तालबद्ध थप्पड़ पड़ता, जिसकी आवाज़ कमरे की चुप्पी में मद्धम गूंजती। अंजलि ने अपनी उंगलियों को दीवार पर और जोर से दबाया, उसके नाखून पलस्तर में गड़ने लगे। विकास ने एक हाथ से उसकी चोटी पकड़ी, उसे हल्का खींचते हुए उसकी गर्दन को पीछे की ओर झुकाया। "चुप रहना… पर तेरी आँखें बता रही हैं सब कुछ," उसने उसके कान में गुर्राते हुए कहा।
उसने अपनी गति धीमी की, लेकिन हर धक्का और गहरा हो गया, अपने लंड की जड़ तक अंदर जाते हुए। अंजलि की चूत में एक तीव्र संकुचन हुआ, जैसे वह उसकी मोटाई को और निगल रही हो। उसकी कराह एक लंबी, दबी हुई फुसफुसाहट में बदल गई। विकास ने अपना दूसरा हाथ उसके पेट पर रखा, नाभि के नीचे दबाव डालते हुए, जहाँ उसका लंड अंदर-बाहर हो रहा था। "यहाँ… महसूस कर," उसने कहा, "कैसे तेरे अंदर जा रहा हूँ मैं।"
अंजलि ने अपनी एक टाँग उठाई, पैर का तलवा दीवार पर टिका दिया, जिससे उसकी चूत और खुल गई और विकास को और गहराई तक पहुँचने में मदद मिली। इस नई स्थिति में उसका लंड एक अलग कोण से टकराया, और अंजलि के मुँह से एक अचानक, तीखी साँस निकली। "हाँ… वहाँ," उसने अनजाने में फुसफुसाया। विकास ने मुस्कुराते हुए उसी जगह पर लगातार धक्का देना शुरू किया, एक छोटी, तेज़ गति से।
उसका हाथ उसके पेट से सरककर उसकी चूची तक पहुँचा, निप्पल को उंगलियों के बीच दबोच लिया। उसने इसे घुमाया, खींचा, और अंजलि की चूत में एक ज्वलंत सनसनी फैल गई। उसकी टाँगें काँपने लगीं, उसका शरीर एक संचित तनाव में जकड़ा हुआ था। विकास ने महसूस किया कि उसकी चूत की मांसपेशियाँ तेजी से सिकुड़ रही हैं। "पहले चढ़ जा… मैं तुझे पहले चढ़ने दूँगा," उसने हाँफते हुए कहा, अपनी गति को एक नियंत्रित, घूमती हुई गति में बदल दिया।
अंजलि का सिर घूम रहा था। उसने अपनी पलकें झपकाईं और विकास की तरफ देखा, जिसकी नज़रें उस पर गड़ी हुई थीं, उसके चेहरे पर वासना और विजय का भाव था। उसने अपना एक हाथ पीछे ले जाकर विकास की जांघ को कसकर पकड़ लिया, उसे और अंदर धकेलने के लिए प्रोत्साहित किया। यह छोटा इशारा विकास के लिए आग का काम कर गया। उसने जोर से एक धक्का दिया और फिर पूरी तरह रुक गया, अंदर घुसा हुआ, सिर्फ़ एक गहरी, सूक्ष्म घूर्णन गति देते हुए।
"मुझे… मुझे आ रहा है," अंजलि ने टूटी हुई साँसों के बीच कहा। उसकी चूत में एक जोरदार ऐंठन शुरू हुई, विकास के लंड को बार-बार निचोड़ते हुए। उसका शरीर दीवार के सहारे ऐंठ गया, उसकी कराहें दबी हुई चीखों में बदलने लगीं। विकास ने उसे चुप कराने के लिए उसके होंठों पर अपना हाथ रख दिया, और अंजलि ने उसकी उंगलियाँ चूस लीं, जबकि उसका ऑर्गैज़म उसे निगलता चला गया।
जैसे ही उसकी लहरें धीमी हुईं, विकास ने अपना हाथ हटाया और उसकी गर्दन पर एक जबरदस्त चुंबन जड़ दिया। "अब मेरी बारी," उसने गुर्राया, और उसकी कमर ने फिर से हिलना शुरू किया, इस बार एक तेज़, अनियंत्रित लय में। उसके धक्के जंगली हो गए, हर बार अंजलि को दीवार से टकराते हुए। अंजलि, अभी भी ऑर्गैज़म के अवशेषों में डूबी हुई, ने अपनी पीठ को मोड़ा, अपनी गांड को उसकी ओर और दबाया।
विकास की साँसें फूलने लगीं, उसकी मुट्ठियाँ अंजलि के कूल्हों पर कस गईं। "अंदर… तुझमें ही छोड़ूँगा," उसने दबी हुई, कर्कश आवाज़ में कहा। एक आखिरी, गहरा धक्का देकर वह रुक गया, उसका पूरा शरीर अकड़ गया। अंजलि ने उसके लंड की गर्म पल्स महसूस की क्योंकि वह उसकी चूत की गहराई में अपना वीर्य छोड़ रहा था, हर झटके के साथ उसके भीतर एक गर्म स्खलन भेजता हुआ।
थोड़ी देर बाद, जब उसकी सांसें सामान्य होने लगीं, विकास ने धीरे से अपना लंड बाहर निकाला। एक गर्म रिसाव अंजलि की जांघों पर बह चला। वह दीवार के सहारे लुढ़क गई, उसके पैरों में अब ताकत नहीं थी। विकास ने अपनी पैंट सही की और उसकी ओर देखा, उसके शरीर पर चाँदनी पड़ रही थी, जो अब शादी के जोड़े के कमरे में एक गुप्त गंदगी से सनी हुई थी।
विकास ने अंजलि को दीवार से सटे फर्श पर लुढ़कते देखा। उसकी साँसें अभी भी अनियमित थीं, जांघों के बीच से गर्म तरल की एक धार रिसकर लहंगे पर गहरा दाग बना रही थी। वह झुका और उसके गीले होंठों को अपने अंगूठे से सहलाया। "अब तो तेरी चूत मेरे वीर्य से भर गई," उसने कान में फुसफुसाया, "अमित जब उठेगा और तुझे चूमने लगेगा, तो उसे इसका स्वाद आएगा।"
अंजलि ने आँखें खोलीं, उसकी पुतलियों में एक धुंधली, थकी हुई चमक थी। उसने कोई जवाब नहीं दिया, बस अपनी टाँगों को थोड़ा सिकोड़ा। विकास का हाथ उसके पेट पर रेंगता हुआ नीचे उसकी जाँघ की ओर बढ़ा, जहाँ उसका वीर्य और उसका अपना रस मिलकर चिपचिपा सा हो गया था। उसने उंगलियों को उसके चूत के छेद के ऊपर घुमाया, जो अभी भी फैला हुआ और गर्म था। "देख, तेरी चूत अभी भी काँप रही है," उसने कहा, और अपनी दो उंगलियाँ फिर से उसकी गीली गुफा में धकेल दीं।
अंजलि ने एक मद्धम कराह भरी, उसकी एड़ियाँ फर्श पर खिसकीं। विकास की उंगलियाँ अंदर घूमीं, अपने ही वीर्य को उसकी गहराई में महसूस करते हुए। "इसे बाहर निकालो," अंजलि ने थकी आवाज़ में कहा, पर विकास ने उंगलियों को और गहराई से घुमाया, उसकी चूत की कोमल दीवारों पर दबाव डाला।
"जल्दी क्या है?" विकास ने कहा, "रात अभी लंबी है।" उसने उंगलियाँ बाहर निकालीं और उन्हें अंजलि के होंठों तक ले गया। "चख, हम दोनों का मिलाजुला रस।" अंजलि ने मुँह फेर लिया, पर विकास ने जबरदस्ती उसकी ठुड्डी पकड़कर उसके मुँह में उंगलियाँ घुसेड़ दीं। उसने विरोध किया, पर कुछ ही पलों में उसकी जीभ ने उन उंगलियों को चूसना शुरू कर दिया, आँखें बंद करके।
विकास ने उसे खींचकर बैठाया और अपनी बाँहों में भर लिया। उसका लंड, जो अभी थोड़ा नर्म हुआ था, फिर से सख्त होने लगा था और अंजलि की नंगी पीठ से रगड़ खा रहा था। "चल, बिस्तर पर चलते हैं," उसने कहा, "तू आराम से लेट जाएगी।"
"नहीं… अमित," अंजलि ने डरी हुई आवाज़ में कहा, बिस्तर की ओर देखते हुए जहाँ उसका पति गहरी नींद में खर्राटे भर रहा था।
"तो फिर यहीं," विकास ने कहा, और उसे धीरे से फर्श पर लिटा दिया। उसने उसके लहंगे के आखिरी टुकड़े को भी उतार फेंका, अब अंजलि पूरी तरह नंगी थी, सिर्फ़ उसकी चूचियों पर चाँदनी की एक रेखा और पसीने से चमकता शरीर। विकास ने अपनी पैंट पूरी तरह उतार फेंकी और उसके ऊपर आ गया, उसके स्तनों के बीच अपना लंड रगड़ने लगा।
"इस बार तुझे ऊपर लेटाकर चोदूंगा," उसने कहा, और उसकी टाँगों को अपने कंधों पर डाल लिया। इस पोजीशन में अंजलि की चूत पूरी तरह खुल गई, गीली और थोड़ी सूजी हुई। विकास ने अपने लंड का सिर उसके छेद पर फिर से टिकाया, पहले से भी ज्यादा आसानी से अंदर घुस गया। अंजलि ने अपनी बाँहें फैलाकर फर्श पर टिका लीं, हर धक्के के साथ उसके स्तन हिलने लगे।
विकास ने धीमी, लेकिन बहुत गहरी गति से चलाना शुरू किया, हर बार अपनी जड़ तक अंदर जाते हुए। उसने झुककर उसके एक निप्पल को मुँह में ले लिया, जीभ से नचाया। अंजलि ने अपनी उंगलियाँ उसके बालों में घोंस दीं, उसे और दबाकर चूसने के लिए प्रोत्साहित किया। उनके बीच सेक्स की गीली आवाज़ फिर से गूंजने लगी, जो अमित के खर्राटों के साथ मिलकर एक अजीब सी तान बना रही थी।
विकास का एक हाथ उसकी गांड की ओर सरका, उसके चुतड़ों के बीच की गर्म खाई को महसूस किया। उसने अपनी उंगली उसके चूत के छेद के ठीक नीचे वाले संकरे रास्ते पर दबाई। अंजलि की टाँगें काँप उठीं। "वहाँ नहीं," उसने हाँफते हुए कहा।
"आज नहीं," विकास ने मुस्कुराते हुए कहा, "पर एक दिन जरूर।" उसने अपनी गति तेज़ की, अब उसका लंड तेजी से अंदर-बाही हो रहा था। अंजलि ने अपनी आँखें बंद कर लीं, और उसके गले से दबी हुई कराहें निकलने लगीं, जो हर धक्के के साथ तीखी होती जा रही थीं। वह फिर से उस कगार पर पहुँचने लगी थी, उसकी चूत की मांसपेशियाँ फड़कने लगी थीं।
विकास ने महसूस किया और उसकी गति को एक अनियंत्रित, जानवरों जैसी तेज़ी में बदल दिया। उसके कूल्हे उसकी जाँघों से टकराने लगे, थप-थप की आवाज़ गूंजने लगी। "साथ निकल," उसने गुर्राते हुए कहा, और अंजलि का शरीर एक ऐंठन में अकड़ गया। उसकी चूत ने विकास के लंड को इतनी जोर से जकड़ा कि उसके प्रतिरोध का एहसास हुआ। विकास ने एक गहरा धक्का दिया और रुक गया, उसका वीर्य फिर से उसकी गहराई में गर्म धाराओं की तरह बहने लगा। अंजलि के मुँह से एक लंबी, दबी हुई चीख निकली, जो कमरे की हवा में लुप्त हो गई।
थोड़ी देर बाद, विकास ने अपना लंड बाहर निकाला और उसे देखा जहाँ से उसका वीर्य फिर से रिसने लगा था। उसने अपनी उंगली से थोड़ा सा उठाया और अंजलि के पेट पर एक लकीर खींच दी। "अब तू पूरी तरह मेरी हो गई," उसने कहा। अचानक, बाहर गलियारे में कदमों की आहट सुनाई दी, धीमी पर नियमित। दोनों की साँसें रुक गईं। आहट दरवाज़े के सामने आकर रुक गई।
दरवाज़े के बाहर खड़े व्यक्ति की साँसों की आवाज़ साफ़ सुनाई दे रही थी। विकास ने अंजलि के ऊपर से हटकर तेज़ी से अपनी पैंट उठाई और पहन ली। अंजलि जमीन पर पड़ी सिसक रही थी, उसने अपने हाथों से अपने स्तन और चूत ढक लिए। विकास ने उसे एक तेज़ इशारे से चुप रहने को कहा और दरवाज़े की ओर बढ़ा। उसने कान दरवाज़े से लगाया।
बाहर से एक खाँसी की आवाज़ आई। "भाभी, मैं हूँ रोहन। माँ ने कहा अमित भैया के लिए दूध ले जाओ।" यह वही बच्चा था जो पहले आया था। अंजलि की धड़कनें और तेज़ हुईं। विकास ने पलटकर उसे देखा, उसकी नज़रों में एक आदेश था। अंजलि ने गला साफ़ किया। "रोहन… दरवाज़ा खुला है। बाहर रख दो।"
"पर माँ ने हाथ में देने को कहा है," रोहन ने जिद की।
विकास ने आँखों से इशारा किया। अंजलि ने अपने आसपास बिखरे कपड़ों को जल्दी से इकट्ठा किया। उसने लहंगा नहीं पहना, बस एक चादर अपने चारों ओर लपेट ली जो फर्श पर पड़ी थी। वह उठी और दरवाज़े की ओर लड़खड़ाते कदमों से बढ़ी। विकास दरवाज़े के पीछे एक तरफ़ खिसक गया, अंधेरे में छिपकर।
अंजलि ने दरवाज़ा एक इंच खोला, अपना चेहरा और चादर में लिपटा कंधा बाहर निकाला। रोहन, एक दस साल का लड़का, गर्म दूध का गिलास लिए खड़ा था। उसकी नज़र अंजलि के गीले बालों और लाल होठों पर टिक गई। "भाभी, तुम्हें पसीना आ रहा है?" उसने पूछा।
"हाँ… गर्मी है," अंजलि ने जल्दी से कहा, गिलास लेते हुए उसकी उंगलियाँ बच्चे की उंगलियों से छू गईं। "अब जाओ सो जाओ।"
रोहन ने दरवाज़े के अंदर झाँकने की कोशिश की, पर अंजलि ने शरीर से उसे रोक दिया। "शुक्रिया," उसने कहा और दरवाज़ा बंद कर दिया, तुरंत चाबी घुमा दी। उसने अपनी पीठ दरवाज़े से टिका दी, आँखें बंद कर लीं। गिलास से उठती भाप उसके चेहरे को गीला कर रही थी।
विकास अंधेरे से बाहर आया और उसके पास पहुँचा। उसने गिलास उसके हाथ से ले लिया और फर्श पर रख दिया। "चतुर लड़की," उसने फुसफुसाया। उसकी उंगलियों ने अंजलि के चादर से ढके हुए कंधे को सहलाया, फिर चादर के ऊपरी किनारे को नीचे खिसकाया। अंजलि की चूची फिर से बाहर आ गई, निप्पल अब भी सख्त और गुलाबी था। विकास ने झुककर उसे अपने होंठों से छुआ, जीभ से एक हल्का, घूमता हुआ स्पर्श दिया।
अंजलि ने एक काँपती साँस भरी। "वह चला गया?" उसने पूछा।
"हाँ," विकास ने कहा, उसका मुँह अब भी उसके स्तन के ऊपर था। "पर तू अभी तैयार नहीं है।" उसने चादर को और नीचे खींचा, अब अंजलि का पेट और नाभि दिखने लगी। चादर का किनारा उसकी चूत के ऊपर वाले बालों को छू रहा था। विकास ने अपना हाथ उसकी जांघ पर रखा और ऊपर सरकाया, अंदर चादर के नीचे। उसकी उंगलियाँ फिर से उस गीले, गर्म क्षेत्र में पहुँच गईं, जो अब भी उसके वीर्य से सनी हुई थी।
अंजलि ने अपना सिर दरवाज़े पर पीछे झुकाया। विकास ने उसकी चूत के ऊपरी होंठ को अँगुलियों के बीच लेकर हल्का सा खींचा। "तू अभी भी काँप रही है," उसने कहा, "डर से या मज़े से?"
"दोनों से," अंजलि ने सच कहा।
विकास ने उसे दरवाज़े से अलग खींचकर कमरे के बीच में ले आया। चाँदनी अब सीधे उसके शरीर पर पड़ रही थी। उसने चादर को पूरी तरह उतार फेंका और अंजलि को नंगा खड़ा देखने लगा। उसकी नज़रें उसके शरीर के हर हिस्से पर घूम रही थीं-स्तनों पर लाल हो चुके निशान, पेट पर सूखते हुए वीर्य की लकीर, और उसकी चूत, जो अभी भी थोड़ी खुली हुई थी और चमक रही थी।
"खड़े-खड़े," विकास ने कहा, और वह स्वयं घुटनों के बल बैठ गया, उसका चेहरा अंजलि की जांघों के सामने। उसने अपने हाथों से उसकी टाँगें फैलाईं और सीधे उसकी चूत की ओर देखने लगा। अंजलि ने अपने हाथ उसके सिर पर रख दिए, संतुलन के लिए। विकास ने अपनी जीभ निकाली और उसकी चूत के ऊपरी होंठ से लेकर नीचे तक एक लंबी, सीधी रेखा खींची, उसके गीलेपन और अपने ही वीर्य का मिश्रण चखा।
अंजलि की टाँगें जवाब देने लगीं। विकास ने अपने हाथों से उसके चुतड़ों को पकड़कर सहारा दिया और अपना मुँह पूरी तरह उसकी चूत पर लगा दिया। उसने जीभ से उसके छेद को खोला और अंदर घुसाया, एक गहरी, घूमती हुई गति में। अंजलि का सिर पीछे को गिरा, उसके मुँह से एक लंबी कराह निकली जिसे रोकना मुश्किल था।
विकास ने लगातार चाटा, कभी जीभ से कभी होंठों से। उसने अंजलि की चूत की गहराई से अपना वीर्य बाहर निकाला और निगलता रहा। अंजलि का शरीर ऐंठन में आ गया, उसकी उंगलियाँ विकास के बालों में कसती चली गईं। "रुक जाओ… मैं फिर से…" उसकी आवाज़ टूट गई।
विकास ने नहीं रुका। उसने एक उंगली उसकी चूत में डाली और जीभ उसके निप्पल जैसे बिंदु पर केन्द्रित कर दी, तेज़ी से उसे उत्तेजित करने लगा। अंजलि के घुटने मुड़ गए। वह चीखने ही वाली थी कि विकास ने अपना हाथ उठाकर उसका मुँह ढक लिया। कराह उसकी हथेली में दब गई। उसकी चूत में एक तेज़ सनसनी दौड़ गई और वह फिर से चरमोत्कर्ष पर पहुँच गई, उसका रस विकास के चेहरे पर बह निकला।
विकास ने उसे धीरे से फर्श पर लिटा दिया, खुद उसके ऊपर आ गया। उसका लंड फिर से तन चुका था और अब अंजलि की जांघ के पास टिका था। "तीसरी बार," उसने कहा, "और इस बार तू मुझे ऊपर बैठकर चोदेगी।"
अंजलि ने आँखें खोलीं, उसकी साँसें अभी भी तेज़ थीं। विकास के शब्दों ने उसे एक नई उत्तेजना से भर दिया। उसने धीरे से सिर हिलाया। विकास ने उसे पकड़कर धीरे से फर्श पर बिठा दिया, खुद उसके सामने घुटनों के बल बैठ गया। उसने अपना सख्त लंड उसके हाथ में रखा। "पहले इसे तैयार कर," उसने आदेश दिया।
अंजलि ने अपनी नज़रें नीची कीं और अपने हाथों से उसके लंड को जकड़ लिया, उसकी लंबाई और मोटाई को महसूस किया। उसने ऊपर-नीचे हाथ चलाना शुरू किया, अंगूठे से सिर पर जमा हुई नमी फैलाते हुए। विकास ने सिर पीछे झटक दिया, एक गहरी साँस भरी। "अब ऊपर आ," उसने कहा।
अंजलि लड़खड़ाते हुए उठी और उसके ऊपर सवार हो गई, अपने घुटनों को उसके कूल्हों के दोनों ओर टिकाया। विकास ने अपने हाथों से उसकी कमर पकड़ी और उसे ऊपर उठाया। अंजलि ने अपने एक हाथ से उसके लंड को सीधा किया और धीरे-धीरे नीचे बैठने लगी। उसके लंड का सिर एक बार फिर उसकी गीली चूत के प्रवेश द्वार पर टिका, और फिर आसानी से अंदर सरक गया। अंजलि ने अपने होंठ दबा लिए, उसकी आँखें चौंधिया गईं क्योंकि वह धीरे-धीरे नीचे उतर रही थी, उसकी चूत की दीवारें उसकी मोटाई के लिए फिर से खिंच रही थीं।
जब वह पूरी तरह नीचे बैठ गई, उसका लंड उसकी गहराई में समा गया, तो दोनों एक पल के लिए स्थिर रहे। अंजलि ने अपनी आँखें बंद कर लीं, इस भराव के एहसास में डूब गई। फिर विकास ने उसकी कमर को हल्का धक्का दिया। "चल, अपनी मर्ज़ी से चोद अपने आप को," उसने फुसफुसाया।
अंजलि ने हल्की, अनिश्चित गति से ऊपर-नीचे होना शुरू किया। हर बार ऊपर उठने पर उसके स्तन हिलते, और नीचे बैठने पर एक मद्धम चपटी आवाज़ आती। विकास का एक हाथ उसके स्तन पर चला गया, निप्पल को दबोचकर मरोड़ा। दूसरा हाथ उसकी गांड पर सरका, उसके चुतड़ों के बीच की खाई में उंगली घुमाते हुए। अंजलि की गति धीरे-धीरे आत्मविश्वास से भरने लगी, वह तेजी से ऊपर-नीचे हो रही थी, उसके बाल हवा में लहरा रहे थे।
"हाँ… ऐसे ही," विकास हाँफने लगा, उसकी उंगलियाँ अब उसकी गांड के छेद पर दबाव डाल रही थीं। अंजलि ने अपनी गति और तेज़ कर दी, उसकी चूत से चिपचिपी आवाज़ें निकलने लगीं। उसने अपना सिर पीछे झटक दिया, उसकी कराहें जोर पकड़ने लगीं। वह उस कगार पर फिर से पहुँच रही थी, उसकी चूत की मांसपेशियाँ फड़कने लगी थीं।
विकास ने अचानक उसे रोक दिया, उसे ऊपर खींचा और फिर ज़ोर से नीचे दबा दिया, अपने लंड को और गहराई तक धकेलते हुए। अंजलि चीख उठी। फिर उसने उसे लिटा दिया, खुद उसके ऊपर आ गया। उसने उसकी टाँगों को अपने कंधों पर रख लिया और एक जानवरों जैसी, अनियंत्रित गति से धकेलना शुरू कर दिया। उसके धक्के इतने तेज़ और गहरे थे कि अंजलि का शरीर फर्श पर खिसकने लगा। उसने अपनी बाँहें फैला दीं, उंगलियाँ फर्श पर खरोंचने लगीं।
"मैं… मैं निकलने वाला हूँ," विकास ने गुर्राते हुए कहा, उसके धक्के अब लड़खड़ा रहे थे। "साथ निकल मेरे साथ!"
अंजलि ने अपनी आँखें खोलीं और विकास के चेहरे को देखा, जो तनाव से विकृत था। उसकी अपनी चूत में एक ज्वालामुखी फटने जैसा एहसास हुआ। "हाँ… हाँ!" वह चिल्लाई, और उनके शरीर एक साथ अकड़ गए। विकास ने एक आखिरी, गहरा धक्का दिया और रुक गया, उसका गर्म वीर्य उसकी गहराई में स्पंदित होता रहा। अंजलि की चूत में ऐंठन भरी लहरें दौड़ गईं, उसका रस विकास के लंड के साथ मिल गया।
कई देर तक वे वैसे ही पड़े रहे, केवल उनकी भारी साँसों की आवाज़ सुनाई दे रही थी। फिर विकास ने धीरे से अपना लंड बाहर निकाला। एक गर्म धार अंजलि की जांघों पर बह चली। वह हिलने-डुलने में असमर्थ थी।
विकास उठा और उसने अंजलि को उठाकर बिस्तर के पास ले जाकर लिटा दिया, उसके पति के पैरों के पास। चाँदनी अब अमित के शांत चेहरे और अंजलि के थके, गंदे शरीर पर पड़ रही थी। विकास ने झुककर अंजलि के होंठों पर एक कोमल चुंबन दिया। "अब सो जा। सुबह तक सब सूख जाएगा," उसने कहा।
उसने कपड़े पहने और दरवाज़े की ओर बढ़ा। मुड़कर देखा तो अंजलि की आँखों में आँसू चमक रहे थे। वह वापस लौटा और उसके कान में फुसफुसाया, "यह हमारा राज है। हमेशा रहेगा।" फिर वह चला गया, दरवाज़ा बंद करते हुए।
अंजलि ने करवट ली और अपने पति की ओर देखा। उसने अपना हाथ उसके हाथ के पास रख दिया, लेकिन छुआ नहीं। उसकी चूत में एक हल्की जलन थी और शरीर पर विकास के स्पर्श के निशान। वह जानती थी कि यह गलत था, पर उसकी चूत अभी भी एक गहरी, गर्म सनसनी से धड़क रही थी। बाहर चाँदनी फीकी पड़ने लगी थी, और पहली सुबह की किरणें क्षितिज पर दिखाई देने लगी थीं।