🔥 बुआ की चूत में भतीजे का लंड
🎭 मायके आई नवविवाहिता की गर्मी से भरी रातें… उसका जवान भतीजा, जो अब बच्चा नहीं रहा, हर नजर में छुपा रहा है वासना का ज्वालामुखी। एक अनचाही खिंचाव, एक गलत पल की चाह।
👤 आन्या (२६ वर्ष): सुंदर, भरी हुई देह, कसी हुई कमर और उभरे हुए स्तन। शादी के बाद भी अधूरी यौन भूख। भतीजे के प्रति गुप्त आकर्षण।
विहान (१९ वर्ष): दबंग, मजबूत शरीर, बदमाश नजरें। बुआ के शरीर के प्रति बचपन से ही कामुक कल्पनाएं।
📍 गाँव का पुराना घर, गर्मी की रात, पंखा चुप। सब सोए हुए। आन्या अकेली अपने कमरे में बेचैन। विहान का कमरा ठीक सामने।
🔥 कहानी शुरू: आन्या ने अपनी साड़ी की पल्लू ढीली की। गर्मी से बेहाल। सामने के कमरे की खिड़की से विहान की सिल्हूट दिखी। वह भी जाग रहा था। उसकी नजरें मिलीं। आन्या ने तुरंत नजरें झुका लीं, पर उसके स्तनों में एक अजीब सी गर्माहट दौड़ गई। विहान ने धीरे से खिड़की की जाली खोली। "बुआ, नींद नहीं आ रही?" आन्या का गला सूख गया। "हां… बहुत गर्मी है।" "मैं नीचे आकर पानी पीने आ रहा हूं।" विहान के जाने की आहट सुनकर आन्या का दिल जोरों से धड़कने लगा। वह उठी और दरवाजे की ओर बढ़ी। बाहर अंधेरा कोठर था। विहान सीढ़ियों से उतर रहा था। उसकी बांहों के उभार साफ दिख रहे थे। आन्या की नजर उसकी ट्राउजर के बटन पर टिक गई। विहान ने पानी पिया और जाते-जाते आन्या के पास रुक गया। "बुआ… आपकी साड़ी… खुल गई है।" आन्या ने नीचे देखा। साड़ी की चुन्नट सचमुच खुल गई थी, पैर तक। विहान ने आगे बढ़कर उसे संभाला। उसकी उंगलियां आन्या की टांग को छू गईं। एक करंट सा दौड़ गया। "छोड़ो… मैं खुद संभाल लूंगी।" पर विहान ने हाथ नहीं हटाया। उसकी सांसें तेज हो गईं। "बुआ… आप…" आन्या ने उसका हाथ पकड़ लिया। "चुप रहो। कोई जाग जाएगा।" पर उसकी आवाज में कंपन था। विहान ने करीब आकर कान में फुसफुसाया, "कितनी सुंदर लग रही हो आज।" आन्या की चूत में एक खिंचाव सा हुआ। वह बोल नहीं पाई। विहान का हाथ उसकी कमर पर चला गया। उसने उसे धीरे से दबाया। आन्या ने आंखें मूंद लीं। यह गलत था। बहुत गलत। पर उसका शरीर सिहर उठा। विहान के होंठ उसके कान के पास थे। "एक बार… बस एक बार…" अचानक ऊपर से खांसी की आवाज आई। दोनों अलग हो गए। आन्या तेजी से अपने कमरे में भागी। दरवाजा बंद करके पीठ उससे लगाई। उसकी चूचियां सख्त हो गई थीं। उसके निप्पल कपड़े से रगड़ खा रहे थे। विहान की गर्म सांसें अब भी उसके कान में गूंज रही थीं। वह समझ गई थी। आज की रात बहुत लंबी होने वाली है।
दरवाजे की लकड़ी पर हल्की सी खरोंच की आवाज हुई। आन्या सिहर उठी। विहान बाहर था, उसकी सांसों की गर्मी दरार से अंदर आ रही थी। "बुआ… दरवाजा खोलो।" उसकी आवाज दबी हुई, पर जिद्दी थी। आन्या ने अपने हाथ काँपते हुए चैन हटाई। दरवाजा एक इंच खुला और विहान की उंगलियाँ अंदर आ गईं, उसकी कलहथनी का स्पर्श आन्या के पेट पर पड़ा।
वह अन्दर सरक आया। कमरे की अँधेरी हवा में उसके शरीर की गर्मी ताप की लहर बनकर फैल गई। विहान ने दरवाजा चुपके से बंद किया और आन्या को दीवार से सटाकर खड़ा कर दिया। उसकी नजरें आन्या के स्तनों पर गड़ी थीं, जो अब भी कपड़े के नीचे उभरे हुए थे। "तुम्हारी चूचियाँ… कितनी सख्त हैं," उसने फुसफुसाया, अपना अंगूठा आन्या के निप्पल पर घुमाते हुए, बिना छुए।
आन्या ने आँखें मूँद लीं, एक कराह निकल गई। विहान ने इस मौके का फायदा उठाया। उसने अपने होंठ आन्या की गर्दन पर टिका दिए, एक नर्म चुंबन दिया, फिर जीभ से हल्का सा लहराया। आन्या का सिर पीछे झुक गया, उसके हाथ विहान के कंधों पर चले गए, उसे दूर धकेलने के बजाय उसकी मांसपेशियों को कसकर पकड़ लिया।
"विहान… यह नहीं…" उसकी प्रतिरोध की आवाज एक दमदार कराह में डूब गई जब विहान का हाथ उसकी साड़ी के ब्लाउज के बटनों पर गया। एक-एक करके बटन खुलने लगे। हर क्लिक की आवाज के साथ आन्या का दिल धड़कता चला गया। ब्लाउज खुल गया, और उसके भरे हुए, गोरे स्तन बाहर झाँकने लगे। विहान की साँस रुक सी गई।
उसने अपना मुँह एक चूची के पास लाया, गर्म साँसों से उसे नहलाया। आन्या के पैरों तक एक सिहरन दौड़ गई। "मत… ऐसे मत…" वह बड़बड़ाई, पर उसकी उंगलियाँ विहान के बालों में घुस गईं। विहान ने निप्पल को अपने होंठों के बीच ले लिया, पहले कोमलता से, फिर ज़ोर से चूसते हुए। आन्या ने अपनी चूत में एक तीव्र खिंचाव महसूस किया, गीलेपन की एक लहर।
विहान का दूसरा हाथ उसकी कमर से फिसलकर उसके चुतड़ों पर पहुँचा, उन्हें अपनी हथेलियों में भरकर कसकर दबाया। वह उसे अपने शरीर से दबोचे हुए था, और आन्या उसकी ट्राउजर के बटन पर अपनी जाँघ से महसूस कर सकती थी कि उसका लंड कितना कड़ा और बड़ा हो चुका है। उसने अपनी जाँघों को हिलाया, एक अनैच्छिक रगड़ पैदा की।
"बुआ… तुम्हारी चूत… गीली है न?" विहान ने उसके कान में कहा, अपनी उंगली साड़ी के पल्लू के नीचे से अन्दर सरकाते हुए। उसकी उंगली आन्या की जाँघ के मुलायम अंदरूनी हिस्से पर पहुँची, और फिर आगे बढ़ते हुए उसके अंडरवियर के किनारे को छू गई। आन्या ने अपनी चूत सिकोड़ ली, पर विहान ने दबाव नहीं हटाया।
उसने अपनी उंगली को धीरे से अंदरूनी लेबिया के ऊपर घुमाया, कपड़े के पतले रेशों के माध्यम से उसकी गर्मी और नमी को महसूस किया। आन्या का सिर उसके कंधे पर गिर गया, वह हाँफने लगी। "रुक जाओ… कोई आ जाएगा…"
"सब गहरी नींद में हैं," विहान बोला, अपना मुँह उसके दूसरे निप्पल पर लगाते हुए। उसने उसे दाँतों से हल्का सा काटा, और आन्या की एक तीखी कराह निकल गई। उसकी उंगली ने अंडरवियर के कपड़े को अलग किया और सीधे उसके भगोशे के फूल पर जा पहुँची। वहाँ पहले से ही गीलापन फैला हुआ था।
विहान ने अपनी मध्यमा उंगली को उसके तंग छिद्र के ऊपर रखा, दबाया नहीं, बस घुमाया। आन्या का शरीर ऐंठ गया। उसने विहान की पीठ पर अपने नाखून गड़ा दिए। "अंदर… उंगली अंदर डालो," वह खुद को रोक नहीं पाई, उसकी इच्छा की आग में जलते हुए।
विहान ने उसकी माँग सुनी। उसने उंगली का दबाव बढ़ाया, उस नर्म, गर्म मांस के छिद्र के अंदर प्रवेश किया। आन्या की चूत ने उसकी उंगली को चारों ओर से कसकर पकड़ लिया। वह धीरे-धीरे उसे अंदर-बाहर करने लगा, हर बार उसकी गहराई को छूता हुआ। आन्या के मुँह से छोटी-छोटी कराहें निकल रही थीं, जो वह दबाने की कोशिश कर रही थी।
उसने अपना लंड आन्या की जाँघ से और जोर से दबाया, रगड़ता हुआ। "बुआ… मैं तुम्हारी चूत के अंदर अपना लंड डालना चाहता हूँ… पूरा का पूरा," वह ग्रन्टल कर उठा, उसकी उंगली की गति तेज होती गई। आन्या ने हाँफते हुए सिर हिलाया, उसकी आँखें अब अर्ध-बंद थीं, वासना के आगे समर्पण कर चुकी थीं। कोठर की हवा में केवल उनकी साँसों की आवाज, कपड़ों के सरसराहट और नम चूत में उंगली के चलने की ध्वनि गूँज रही थी।
विहान ने अपनी उंगली उसकी चूत से बाहर खींची, चिपचिपे पन को आन्या की जांघ पर मलते हुए। "इस कपड़े को हटाओ… मुझे तुम्हारा सब कुछ देखना है," उसने कहा, अपने दांतों से आन्या के ब्लाउज के कपड़े को खींचकर उसके कंधे से नीचे उतार दिया। आन्या ने सहमाते हुए अपने हाथ ऊपर उठाए, जिससे विहान ने पल्लू और ब्लाउज को एक साथ उसके ऊपर से सरका दिया। अब वह केवल अपनी साड़ी की पेटीकोट और अंडरवियर में थी, उसके भारी स्तन हवा में झूल रहे थे, निप्पल गहरे गुलाबी और सख्त।
विहान ने उसे देखा, अपनी जीभ नीचे होठों पर फेरी। उसने आन्या को बिस्तर के किनारे तक ले जाकर बैठा दिया। खुद उसके सामने घुटनों के बल बैठ गया। उसकी नजरें आन्या के जांघों के बीच के उभार पर टिक गईं, जहां सूती अंडरवियर पहले से ही गहरे रंग की नमी से भीगी हुई थी। "इसे भी उतारो," उसने आदेश दिया, पर आन्या के हाथ कांप रहे थे। विहान ने खुद ही अपने हाथ आगे बढ़ाए, उसकी कमर पर बंधी नाड़ी को खोल दिया। पेटीकोट ढीला हुआ और विहान ने उसे उसके कूल्हों से नीचे खींच दिया।
अब केवल अंडरवियर बची थी। विहान ने अपने अंगूठे को उसके ऊपरी किनारे के नीचे डाला, आन्या के पेट के निचले हिस्से को छूते हुए। उसने धीरे से कपड़े को नीचे खींचा, आन्या की गुप्त जगह धीरे-धीरे बाहर आती गई। पहले उसके घने बाल, फिर उभरे हुए भगोशे। आन्या ने शर्म से अपनी जांघें बंद कर लीं, पर विहान ने उन्हें अपने हाथों से खोल दिया। "ऐसे मत छुपाओ… यह तो बहुत सुंदर है," उसने कहा, और अपना मुंह उसकी चूत के इतने करीब लाया कि आन्या उसकी गर्म सांसें अपने भीगे हुए मांस पर महसूस कर सकी।
विहान ने जीभ निकाली और उसने आन्या के भग के ऊपरी हिस्से को, क्लिटोरिस के छोटे से उभार को, बस हल्का सा छुआ। आन्या का पूरा शरीर ऐंठ गया, उसने चादर को मुट्ठी में भींच लिया। "अरे… ऐसे मत," वह कराह उठी। पर विहान ने रुकने का नाम नहीं लिया। उसने अपनी जीभ से उस नन्हें बटन को घेरा, हल्के-हल्के चाटते हुए, फिर जोर से चूसा। आन्या की पीठ धनुष की तरह उठी, उसने अपनी ठुड्डी छाती से लगा ली, मुंह से दबी हुई चीख निकलने से रोकते हुए।
विहान के हाथ उसकी जांघों को मजबूती से पकड़े हुए थे। उसने अपनी नाक और होंठों को आन्या की चूत के गीले मांस में घुमाया, गहराई से सांस लेते हुए उसकी खुशबू को भरा। "तुम्हारी चूत का स्वाद… अमृत जैसा है," उसने गुर्राते हुए कहा और फिर से जीभ डुबो दी, इस बार सीधे उसके छिद्र में। आन्या ने विहान के बालों को दोनों हाथों से जकड़ लिया, उसे अपनी ओर और दबाया, उसके मुंह को अपनी चूत पर रगड़ते हुए।
थोड़ी देर बाद, विहान ने अपना सिर उठाया। उसके होंठ चमक रहे थे। वह खड़ा हुआ और अपनी ट्राउजर की फीपी खोलने लगा। आन्या की नजरें उसके हाथों पर चिपकी रहीं। जब उसने ट्राउजर और अंडरवियर नीचे खींची, तो उसका लंड सख्त होकर बाहर आया, मोटा और लंबा, शीर्ष पर गहरा लाल। आन्या की आंखें फैल गईं। विहान ने उसे अपने हाथ में ले लिया, आन्या की ओर इशारा करते हुए कई बार थपथपाया। "देखो, यह सिर्फ तुम्हारे लिए है, बुआ।"
वह बिस्तर पर आन्या के ऊपर आ गया, अपने घुटनों को उसकी जांघों के बीच टिकाया। उसने अपने लंड को आन्या की चूत के बाहरी होंठों के बीच रखा, ऊपर-नीचे रगड़ने लगा। आन्या की चूत फड़फड़ाई, और अधिक नमी बह निकली। "प्लीज…" आन्या फुसफुसाई, "अब और नहीं रुकूंगी।" विहान ने मुस्कुराते हुए अपने शरीर का भार आगे डाला। लंड का मोटा सिर उसके तंग छिद्र के द्वार पर दबाव डालने लगा। आन्या ने गहरी सांस ली, अपने शरीर को ढीला छोड़ दिया।
विहान ने धक्का दिया। एक इंच अंदर घुसा, आन्या की चूत की तंग गर्मी ने उसे चारों ओर से लपेट लिया। आन्या की सांस रुक गई, उसकी आंखें विस्फारित हो गईं। विहान रुका, उसके चेहरे पर पसीना चमक रहा था। "कितनी तंग है…" वह हांफा। फिर उसने धीरे-धीरे, लगातार धक्का देना जारी रखा। आन्या ने अपने नाखून विहान की पीठ में घोंप दिए, जैसे-जैसे वह पूरी तरह से अंदर समाता गया, उसकी एक लंबी कराह कमरे में गूंज गई।
विहान ने पूरी गहराई तक पहुँचते ही एक गहरी, संतुष्ट कराह भरी। उसने अपनी मजबूत भुजाओं से आन्या को कसकर अपने सीने से चिपका लिया, उसके भारी स्तन उसकी पसली पर दब रहे थे। "कितनी गर्म…कितनी तंग…" वह फुसफुसाया, अपने होठ आन्या के गाल पर दबाते हुए। फिर उसने हिलना शुरू किया, शुरुआत धीरे-धीरे, लंड को थोड़ा बाहर खींचकर फिर उसी गर्म, नम आवरण में वापस धकेलते हुए।
हर धक्के के साथ आन्या की एक मद्धिम कराह निकलती, उसकी उंगलियाँ विहान की पीठ में और गहरे घुस जातीं। उसने अपनी जाँघें विहान की कमर के इर्द-गिर्द लपेट लीं, उसे और अंदर खींचते हुए। विहान का सिर उसके कंधे पर टिका था, उसकी साँसें गर्म और तेज आन्या की गर्दन पर चल रही थीं। "बुआ…तुम्हारी चूत मेरे लंड को चूस रही है," उसने कान में कहा, अपनी गति थोड़ी तेज करते हुए।
आन्या ने आँखें खोलीं और विहान की आँखों में देखा, जो अंधेरे में भी वासना से चमक रही थीं। उसने उसके होंठों पर अपनी उंगली रखी। "श…शांत रहो…हिलते रहो," उसने दबी, काँपती आवाज में कहा। विहान ने उसकी उंगली को अपने मुँह में ले लिया, जीभ से चूसते हुए, जबकि उसकी कमर का जोर बढ़ता गया। अब वह पूरी लय में हिल रहा था, हर बार पूरा बाहर निकलकर पूरी ताकत से वापस घुसता।
उनके शरीरों के टकराने की आवाज, चिपचिपी ध्वनि कमरे में भरने लगी। आन्या ने अपना सिर तकिए में दबा लिया, कराहों को दबाने की कोशिश करते हुए। विहान का एक हाथ उसकी गाँड के नीचे सरका, उसे ऊपर उठाकर और गहरा धक्का लगाने के लिए। दूसरा हाथ उसके स्तन पर वापस आया, निप्पल को उंगलियों के बीच लेकर मरोड़ता हुआ, खींचता हुआ।
"विहान…मैं…मैं जल्दी ही…" आन्या हाँफी, उसकी चूत में तेजी से संकुचन शुरू हो गए। विहान ने इसे महसूस किया। उसने अपनी गति और तेज कर दी, अब पूरी ताकत से, उसकी जाँघें आन्या की नितंबों से जोर से टकरा रही थीं। "तैयार हो जाओ, बुआ…मेरे साथ आओ," वह गुर्राया।
उसने आन्या का मुँह अपनी ओर खींचा और एक जंगली, अधीर चुंबन में उसके होंठ चाट लिए। आन्या ने जवाब दिया, अपनी जीभ उसके मुँह में डालते हुए, उनकी लार मिलने लगी। चुंबन गहरा हुआ, अधिक लालसा भरा, जबकि उनके निचले हिस्से एक उग्र लय में जुड़े रहे।
अचानक आन्या का शरीर कठोर हो गया, उसकी आँखें चौंधिया गईं। एक लंबी, दबी हुई चीख उसके गले से निकली जब उसकी चूत में एक जोरदार, लहरदार ऐंठन ने विहान के लंड को निचोड़ना शुरू कर दिया। विहान ने अपना मुँह उसके कंधे पर दबा दिया और एक गहरा, कंपकंपाता धक्का दिया, अपना गर्म तरल उसकी गहराई में उड़ेलते हुए। उसका शरीर ऐंठ गया, हर धारा के साथ एक कराह निकलती।
कुछ पलों तक वे ऐसे ही जमे रहे, दोनों हाँफ रहे थे, उनके शरीर एक-दूसरे से चिपके हुए, पसीने से तर। विहान ने धीरे-धीरे अपना लंड बाहर खींचा, एक मद्धिम चूसने की आवाज के साथ। आन्या सिहर उठी। वह उसके बगल में गिर गया, अपना हाथ उसके पेट पर रख दिया, जो अभी भी हल्का उठा-गिरा हो रहा था। कमरे में केवल उनकी साँसों का शोर और दूर कुत्ते के भौंकने की आवाज थी। विहान ने आन्या के कान के पास अपने होठों को हिलाया। "अब तो हम शुरू कर चुके हैं, बुआ। यह रुकने वाला नहीं।"
विहान के शब्द अभी हवा में ठहरे ही थे कि आन्या ने अपनी बांह उठाकर उसके चेहरे को छुआ, उंगलियां उसके गालों पर फिरीं। "तू बहुत बदमाश है," वह फुसफुसाई, पर उसकी आँखों में एक नया साहस था। विहान ने उसकी कलाई को पकड़ा और होंठों से उसकी उंगलियों के पोर चाटे। "तुम्हारा ही सिखाया हुआ है, बुआ।"
उसका दूसरा हाथ आन्या के पेट के नीचे सरकने लगा, उसके जघन के घने बालों में उलझते हुए। आन्या ने अपनी जांघें थोड़ी खोलीं, एक मूक निमंत्रण। विहान की उंगली फिर से उसके भीगे भगोशे पर पहुंची, इस बार बिना किसी झिझक के। उसने उस नन्हें बटन को घेरा, गोल-गोल घुमाया, और आन्या की कमर तन कर ऊपर उठ आई। "देखो तो… फिर से तैयार हो रही हो," विहान ने कहा, अपना मुंह उसके एक निप्पल के पास ले जाते हुए। उसने उसे अपने दांतों से हल्का सा खींचा, और आन्या की सांसें फिर तेज हो गईं।
"अब… अब धीरे से," आन्या बड़बड़ाई, अपने हाथों से विहान के सिर को अपने स्तनों पर दबाए हुए। विहान ने आज्ञा मानी, निप्पल को कोमलता से चूसना शुरू किया, जबकि उसकी दो उंगलियां आन्या की चूत के द्वार पर जमा हो गईं, अंदर घुसने का इंतजार कर रही थीं। आन्या ने अपनी एड़ी विहान के कूल्हे पर रखी और उसे अपनी ओर खींचा। "अंदर… फिर से," उसकी आवाज लालसा से भरी हुई थी।
विहान ने उंगलियां डालीं, इस बार दोनों। आन्या की चूत ने तुरंत उन्हें निगल लिया, गर्म और संकरी। विहान ने उन्हें अंदर-बाहर चलाना शुरू किया, एक तेज, गहरी लय में। आन्या का सिर तकिए पर इधर-उधर हिलने लगा, उसके मुंह से दबी हुई कराहें निकल रही थीं। विहान ने अपना मुंह उसके पेट पर लगाया, नाभि के आसपास नर्म चुंबन देते हुए नीचे की ओर बढ़ा। उसकी जीभ ने उसके जघन रेखा को टटोला, फिर वहीं रुक गई।
"विहान… क्या कर रहा है?" आन्या ने हांफते हुए पूछा, अपनी कोहनियों के बल उठकर उसे देखा। विहान ने शैतानी मुस्कान के साथ ऊपर देखा। "वही जो पहले किया था। पर अब और अच्छे से।" इतना कहकर उसने आन्या की जांघों को और चौड़ा किया और अपना सिर उसकी चूत के बीच में डाल दिया। इस बार उसने बिल्कुल शुरुआत से ही जोरदार अंदाज अपनाया। उसकी जीभ चौड़ी होकर पूरे भगोशे को चाटने लगी, फिर उसने अपने होंठों से क्लिट को चूसा, एक लयबद्ध तरीके से।
आन्या ने चादर को मुंह में दबा लिया, उसकी कराहें कपड़े में दफन हो गईं। उसकी एड़ियां बिस्तर में धंस गईं, कूल्हे ऊपर उठे। विहान का एक हाथ उसकी गांड के नीचे से निकलकर उसे सहारा दे रहा था, दूसरा हाथ उसके एक स्तन को दबोचे हुए था। आन्या का शरीर एक तार की तरह तन गया, फिर एक जोरदार ऐंठन के साथ ढीला पड़ गया। वह चीखने ही वाली थी कि विहान ने तुरंत अपना मुंह हटाकर उसके होंठों को अपने से जोड़ लिया, उसकी सारी आवाज निगल ली।
चुंबन उग्र और लार से भीगा हुआ था। विहान ने अपना कड़ा लंड फिर से आन्या की चूत के खिलाफ रगड़ा। "इस बार तुम ऊपर," उसने हाँफते हुए कहा। आन्या, अभी भी ऑर्गेज्म के हल्के झटकों से कांपती हुई, समझ गई। विहान ने पलटकर अपनी पीठ के बल लेट जाने का इशारा किया। आन्या उठी और उसके ऊपर सवार हो गई, उसकी जांघें उसकी कमर के दोनों ओर। उसने विहान के सीने पर हाथ रखे, उसकी नजरों में डूबी रही, फिर धीरे से नीचे बैठी, अपनी चूत को उसके लंड के सिर पर केंद्रित करते हुए।
विहान की आँखें बंद हो गईं, उसने अपने होठ दाँतों से दबा लिए जब आन्या ने धीरे-धीरे नीचे की ओर दबाव डाला। वह अंदर समा गई, इस बार एक नई कोण से, गहराई तक पहुँचते हुए। आन्या ने अपना सिर पीछे झुकाया, अपने लंबे बाल पीठ पर बिखेरते हुए, और हिलना शुरू किया। उसकी गति धीमी, नियंत्रित और अधिक मादक थी। वह ऊपर उठती, लगभग पूरी तरह बाहर आती, फिर धीरे से वापस नीचे बैठती, अपनी आंतरिक मांसपेशियों को उसके लंड पर कसती। विहान के हाथ उसकी कमर पर चिपक गए, उसे मार्गदर्शन करने के बजाय बस उसके उभार को महसूस करते रहे।
"बुआ… तुम…" विहान की आवाज भर्रा गई। आन्या ने मुस्कुराते हुए अपनी गति तेज की, अब अपने कूल्हों को घुमाते हुए, चक्करदार गति में। उसने अपने हाथों से अपने स्तनों को सहलाया, निप्पलों को उंगलियों के बीच दबाया, अपनी ही उत्तेजना को बढ़ाते हुए। विहान ने बैठने की कोशिश की ताकि वह उसके स्तन चूस सके, पर आन्या ने उसे वापस लिटा दिया। "नहीं… बस देखो," उसने कहा, एक नटखट चमक उसकी आँखों में। वह और तेजी से ऊपर-नीचे होने लगी, उनके शरीरों के टकराने की आवाज फिर से गूंज उठी। विहान का शरीर तन गया, उसकी उंगलियां आन्या की कमर में घुस गईं। "मैं… मैं निकलने वाला हूँ," वह चेतावनी देने की कोशिश करते हुए गुर्राया।
"नहीं," आन्या ने दबी पर आदेश भरी आवाज में कहा, अपनी गति रोक दी और अपनी चूत की मांसपेशियों को जोर से सिकोड़ा। विहान एक कराह के साथ झटका गया। "अभी नहीं।" वह फिर से हिलने लगी, इस बार और भी धीमे, लंबे स्ट्रोक में, विहान को कगार पर लटकाए रखते हुए। उसने आगे झुककर अपने होंठ उसके कान के पास लाए। "जब मैं कहूंगी, तभी," उसने फुसफुसाया, और उसकी जीभ ने विहान के कान का लोलक निगल लिया।
विहान की साँसें रुक-रुककर आ रही थीं, उसकी आँखें आन्या के चेहरे पर जकड़ी हुईं। आन्या ने अपने आंतरिक मांसपेशियों को एक बार फिर कसा, विहान के लंड को एक नर्म मगर दृढ़ पकड़ में लेते हुए। उसकी यह हरकत विहान के लिए असहनीय थी। "बस… बस अब नहीं रुक सकता," वह गिड़गिड़ाया, उसके हाथ आन्या के चुतड़ों पर चिपक गए, उन्हें भीतर की ओर दबाने लगे।
आन्या ने एक नटखट मुस्कान बिखेरी। उसने अपनी गति फिर से बदली, अब ऊपर उठकर लंड के सिरे तक आते हुए, फिर अचानक पूरी ताकत से नीचे बैठते हुए। विहान की चीख गले में ही दब गई। आन्या ने आगे झुककर उसके होंठों को अपने से जोड़ लिया, उसकी हर आवाज को चुंबन में दफन कर दिया। उसकी जीभ ने विहान के मुँह में घुसपैठ की, लालसा से उसकी लार चाटी। इस दौरान उसके नितंब लगातार ऊपर-नीचे डोल रहे थे, एक अथक लय में।
विहान का आत्म-नियंत्रण टूट गया। उसने आन्या को पलटते हुए बिस्तर पर दबोच लिया। अब वह ऊपर था, अपने घुटनों के बीच आन्या की जाँघों को कैद करते हुए। उसने आन्या के पैरों को अपने कंधों पर रख लिया, एक नई गहराई तक पहुँच की स्थिति बनाते हुए। "अब मेरी बारी," वह गुर्राया, और बिना किसी चेतावनी के पूरी गति से अंदर घुस गया।
हर धक्का आन्या को बिस्तर में धंसा रहा था, उसके स्तन उछल-उछल कर हवा में लहरा रहे थे। विहान का एक हाथ उसकी गांड के नीचे से निकला, उसे और ऊपर उठाया, जबकि दूसरा हाथ उसके गले के पास टिका, उसकी नब्ज की तेज धड़कन को महसूस कर रहा था। आन्या की आँखें लगातार विहान से जुड़ी हुई थीं, उनमें आत्मसमर्पण और चुनौती दोनों का मिश्रण था। वह हर धक्के पर एक दबी हुई कराह निकालती, उसके नाखून अब विहान की बाँहों पर लाल रेखाएँ खींच रहे थे।
"तुम… तुम मेरी… हो," विहान हाँफता हुआ बोला, उसकी गति अब अनियंत्रित, जानवरी हो चुकी थी। आन्या ने अपनी एड़ियाँ उसकी पीठ पर जोर से दबाईं, उसे और तेज, और गहरा धकेलते हुए। उसकी चूत में एक फड़फड़ाहट शुरू हो गई, ऐंठन की लहरें फिर से उमड़ने लगीं। उसने अपना सिर पीछे झटका, गर्दन की नसें तन गईं। "हाँ… अभी… विहान!" उसकी आवाज़ एक दमदार कराह में विलीन हो गई।
विहान ने उसके मुंह पर जोरदार चुंबन जड़ा, उसकी चीख को अपने अंदर खींच लिया। उसने एक अंतिम, गहरा धक्का दिया और रुक गया, कांपते हुए, अपना बीज उसकी गर्म गहराई में उड़ेल दिया। आन्या का शरीर भी ऐंठकर ढीला पड़ गया, उसकी चूत की तीव्र धड़कन विहान के लंड को निचोड़ रही थी। वे दोनों सांसों के लिए हाँफते रहे, उनके शरीर चिपके हुए, पसीने से सने, एक दूसरे की धड़कनों का संगीत सुनते हुए।
कुछ देर तक वे सिर्फ सांसें ही लेते रहे, एक-दूसरे की नम त्वचा से चिपके हुए। फिर विहान ने धीरे से अपना लंड बाहर खींचा, और आन्या सिहर उठी। वह उसके बगल में लेट गया, अपना हाथ उसके पेट पर रख दिया। "अब क्या?" आन्या ने फुसफुसाया, अभी भी उसकी आँखें बंद थीं। विहान ने उसके कान में अपने होठ रखे। "अब तो रिश्ता बन गया, बुआ। अब कोई पीछे नहीं हट सकता।"
आन्या ने आँखें खोलीं और अँधेरे में छत की ओर देखने लगी। उसके स्तन अब भी उठ-गिर कर रहे थे। विहान का हाथ उसके पेट से फिसलकर उसकी चूत के पास पहुँचा, जहाँ से अभी भी उनका मिश्रित रस टपक रहा था। उसने अपनी उंगलियों से उसे सहलाया। "देखो, तुम्हारी चूत अभी भी फड़क रही है," वह बोला। आन्या ने उसका हाथ पकड़ लिया। "बस करो। थोड़ी शर्म करो।"
"शर्म तो तुमने तब करनी थी जब मैं पहली बार तुम्हारे कमरे में आया था," विहान ने नटखट अंदाज में कहा, और अपना सिर उसके स्तनों के बीच रख दिया। उसने एक चूची को मुँह में ले लिया, बच्चे की तरह चूसने लगा। आन्या ने उसके बालों में उंगलियाँ फेरते हुए एक लंबी साँस छोड़ी। यह गलत था, नारकीय रूप से गलत। पर उसके शरीर में अब एक अजीब सी शांति भर गई थी, जैसे कोई भूखा अंततः भरपेट भोजन पा गया हो।
थोड़ी देर बाद विहान ने फुसफुसाकर कहा, "एक बार और।" आन्या ने हँसते हुए उसका सिर धक्का दिया। "अब नहीं। सुबह होने वाली है। तुझे अपने कमरे में जाना होगा।" विहान ने आन्या को अपनी ओर घुमाया और पीछे से उसे कसकर भर लिया, अपना कड़ा हुआ लंड फिर से उसकी गांड के बीच में दबा दिया। "लेकिन यह तो तैयार है फिर से," उसने कहा, और अपने कूल्हों को हल्का सा हिलाया।
आन्या ने कराह भरी। "तू थकता नहीं है क्या?" "तुम्हारे सामने कभी नहीं," विहान बोला, और उसने आन्या के कान का लोलक दाँतों से कुतरना शुरू कर दिया। उसका एक हाथ उसके स्तन को दबोचे हुए था, दूसरा हाथ उसकी जाँघ के बीच में सरक रहा था। आन्या ने अपनी आँखें मूँद लीं और अपने कूल्हों को पीछे की ओर धकेला, विहान के लंड को अपनी गांड की खाँच में और गहराई से महसूस किया।
विहान ने उसकी गांड के गोल-गोल चुतड़ों को अपनी हथेलियों से भरा और उन्हें अलग किया। उसने अपना लंड आन्या की चूत के बजाय अब उसके गुदा के छिद्र के ऊपर टिका दिया। आन्या की साँस अटक गई। "नहीं… वहाँ नहीं, विहान।" "बस एक बार… हल्का सा," वह गिड़गिड़ाया, और उसने अपने लंड के सिरे को उस नए, संकीर्ण मार्ग के द्वार पर दबाना शुरू कर दिया। आन्या तन गई, पर विहान के हाथ उसे सहलाने लगे। "आराम करो… मैं ज़बरदस्ती नहीं करूँगा।"
उसने अपनी उंगली आन्या की चूत से कुछ बची हुई नमी लेकर उसके गुदा पर लगाई और धीरे-धीरे दबाव बढ़ाया। आन्या की मुट्ठियाँ चादर में कस गईं। थोड़ी प्रतिरोध के बाद, लंड का सिरा अंदर घुस गया। एक तीखी, जलन भरी भर्राहट ने आन्या को घेर लिया, पर विहान ने रुककर उसे चूमा। "कितनी टाइट है…" वह हाँफा। फिर बहुत धीरे-धीरे, एक इंच के हिसाब से, वह अंदर समाता चला गया। आन्या के मुँह से लगातार दबी हुई कराहें निकल रही थीं, एक अजीबोगरीब पीड़ा और आनंद का मिश्रण।
जब वह पूरी तरह अंदर पहुँच गया, तो दोनों स्थिर रहे। विहान ने उसके कंधे पर अपना माथा टिका दिया। "ऐसा लग रहा है जैसे मैं तुम्हारी हर चीज़ कब्ज़े में ले चुका हूँ," उसने कहा। फिर उसने हिलना शुरू किया-छोटे, गहरे धक्के, जो आन्या के पूरे शरीर में एक नया कंपन भर रहे थे। आन्या ने अपना हाथ पीछे बढ़ाकर विहान की जाँघ को पकड़ लिया, उसे और अंदर खींचते हुए। यह चोटिल करने वाला, पर विचित्र रूप से अधिक intimate महसूस हो रहा था।
उनकी गति धीरे-धीरे ताल में पड़ गई। विहान का एक हाथ आन्या के क्लिट पर मँडराने लगा, उसे उसी लय में रगड़ता हुआ। आन्या का शरीर दोहरे उत्तेजना के बोझ तले कराह उठा। वह जल्द ही एक और ऑर्गेज्म के कगार पर झूलने लगी, उसकी चूत तेजी से फड़कने लगी। विहान ने अपनी गति तेज कर दी, उसकी जाँघें आन्या के चुतड़ों से जोर से टकरा रही थीं। "मैं तुम्हारे अंदर ही निकलना चाहता हूँ… इस बार," वह गुर्राया।
आन्या ने हाँफते हुए सिर हिलाया, वह बोल नहीं पा रही थी। विहान ने एक last जोरदार धक्का दिया और गहराई तक जमा देते हुए रुक गया, उसका गर्म तरल उसकी आंतों में भर दिया। उसी क्षण आन्या भी टूट गई, उसकी चूत में एक लंबी, लहरदार ऐंठन दौड़ गई, और वह चीखने लगी, जिसे विहान ने अपने हाथ से उसके मुँह को दबाकर रोक दिया।
फिर सन्नाटा। केवल उनकी भारी साँसें। विहान ने धीरे से अपना लंड बाहर निकाला और आन्या को अपनी ओर घुमा लिया। उसके चेहरे पर पसीना और आँसू मिले हुए थे। विहान ने उन्हें चूम लिया। "अब तू सचमुच मेरी हो गई," वह बोला। आन्या ने उसकी आँखों में देखा, और फिर उसके सीने से चिपक गई। बाहर, पहली कौवे की आवाज़ गूंजी। सुबह होने वाली थी।
विहान ने उठकर अपने कपड़े पहने। आन्या चादर ओढ़े उसे देखती रही। दरवाज़े पर जाते हुए, विहान ने मुड़कर देखा। "आज रात फिर?" आन्या ने कोई जवाब नहीं दिया, बस देखती रही। जब दरवाज़ा बंद हुआ, तो वह लेटी रही, अपने शरीर पर उभरे निशानों को महसूस करती हुई। एक निषिद्ध संबंध शुरू हो चुका था, जिसका कोई अंत नहीं दिख रहा था। बाहर, सूरज की पहली किरण खिड़की पर पड़ी।